सख्ती:56 विभागों में सालाना 14000 करोड़ की खरीदी, कीमत पर उठे सवाल, गड़बड़ी रोकने बनाए नियम

प्रदेश में सरकारी विभागों में खरीदी में लगातार भ्रष्टाचार और अनियमितताएं सामने आ रहे हैं। इसे रोकने के लिए सरकार ने नए नियम बना दिए हैं। इसमें अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए विभाग की क्रय समिति बनाने, खरीदी जाने वाली वस्तु का सैंपल लेने, फैक्ट्री का मुआयना करने जैसी शर्तें भी जोड़ दी गई हैं। हाल के दिनों में विभागों में जेम पोर्टल से हुई खरीदी में सामग्रियो‌ं की कीमत और गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं। इसी के बाद वाणिज्य व उद्योग विभाग ने नियमों को और कड़ा कर दिया है। साथ ही विदेश से सामान आयात करने का भी अधिकार दिया गया है। राज्य के 56 विभागों में हर साल लगभग 400 टेंडर होते हैं। इनसे 14-15 हजार करोड़ रुपए की खरीदी की जाती है। विभाग ने खरीदी करने वाले अधिकारी को क्रय समिति की अनुशंसा से संतुष्ट नहीं होने पर टेंडर रद्द करने का अधिकार दे दिया है। अब ऐसी वस्तुएं जो देश में नहीं बनती और उच्च तकनीक की हैं, उन्हें विदेशों से आयात किया जा सकेगा। इन्हें केंद्र सरकार की अधिकृत संस्थाओं से ही खरीदा जा सकेगा। तीन लाख से अधिक की खरीदी होने पर महालेखाकार जांच करेंगे। रोटी मेकिंग मशीन खरीदी की होगी जांच प्रयास विद्यालयों में रोटी मेकिंग मशीन, कम्प्यूटर, कम्प्यूटर टेबल, कुर्सी की खरीदी में गड़बड़ी सामने आई। इस पर आदिम जाति व अनुसूचित जाति विकास कल्याण मंत्री रामविचार नेताम ने जांच के आदेश दिए। पानी के जग की खरीदी पर विवाद जेम पोर्टल से छात्रावासों के लिए पानी का जग की खरीदी पर विवाद हुआ। आरोप लगा कि 32 हजार रुपए में जग की खरीदी हुई है। हालांकि जांच में यह बात सामने आई कि ना तो खरीदी हुई है और ना ही भुगतान। समितियों की देखरेख में होगी खरीदी विभागों में अधिक कीमत की खरीदी समितियों की देखरेख में होगी। इसमें संबंधित विभाग के उप सचिव व एक सदस्य, वित्त सेवा के अधिकारी या लेखा शाखा के प्रभारी शामिल होंगे। इसमें खासकर वे वस्तुएं शामिल होंगी जिनका मूल्य एक वित्तीय वर्ष में एक करोड़ रुपए से अधिक हो। अगर कोई गड़बड़ी पाई गई तो क्रय प्रक्रिया रद्द की जाएगी। नमूना लेना अनिवार्य सचिव सचिव रजत कुमार के अनुसार अब सही वस्तुओं की खरीदी के लिए उनके नमूने यानी सैंपल लिए जाने का भी प्रावधान किया गया है। अफसर संबंधित निर्माण स्थल या कारखाने का निरीक्षण करेंगे। क्रय समिति के तकनीकी विशेषज्ञ गुणवत्ता का परीक्षण करेंगे। समिति की अनुशंसा पर ही खरीदी होगी। अगर संबंधित विभाग के अधिकारी समिति की अनुशंसा नहीं मानते तो इसकी लिखित वजह बतानी होगी। समिति का दायित्व {बजट राशि का आवंटन समय पर कराना। {समय सीमा पर भुगतान कराना। {सूक्ष्म व लघु उद्यमियों का पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन। {विक्रेताओं-सप्लायरों के कार्टेल पर प्रतिबंध। {गुणवत्तापूर्ण सामग्री की उचित दर पर खरीद। {स्थानीय लघु उद्योग को प्रोत्साहन देना। {एससी-एसटी-ओबीसी उद्यमियों को प्राथमिकता। हस्तशिल्प को महत्व छत्तीसगढ़ के हस्तशिल्पियों, महिला स्व-सहायता समूहों के लिए टेंडर नहीं होगा। बेल मेटल, लोह, काष्ट, बांस, शीशम, कौड़ी शिल्प, स्टेशनरी, सजावटी सामग्री की खरीद खादी ग्रामोद्योग बोर्ड, हथकरघा विकास सहकारी संघ, शिल्प प्रकोष्ठ से होगी। ट्रेनिंग की सुविधा पर अनिवार्य नहीं: जैम पोर्टल से खरीदी के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों को ट्रेंड करने की भी व्यवस्था है। इसकी अनिवार्यता न होने से कुछ ही लोग इसमें शामिल होते हैं। विभाग के अफसरों का मानना है कि गड़बड़ी एक वजह यह भी है। इसे सबके लिए अनिवार्य करना चाहिए।

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