पॉलिटिकल रिपोर्टर| रांची मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा तैयार सचिवालय अनुदेश में संशोधन के प्रस्ताव पर सहमति नहीं दी। सीएम ने निर्देश दिया है कि वित्त सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया जाए। उसमें कंट्रोलिंग, सर्विस और वर्क्स डिपार्टमेंट के संयुक्त सचिव स्तर या उससे ऊपर के अधिकारियों को शामिल किया जाए। फिर कमेटी की अनुशंसा पर प्रस्ताव तैयार कर कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग सरकार को स्वीकृति के लिए भेजें। कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग अविभाजित बिहार के समय 1952 में बने सचिवालय अनुदेश में वर्तमान परिस्थिति के अनुरूप संशोधन की कोशिश कर रहा था। कई तरह के तकनीकी बदलावों को अनुदेश में शामिल किया था। कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने सचिवालय कर्मियों के पद संरचना में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया था। उसमें चार एएसओ पर एक एसओ का पद सृजित करने की अनुशंसा थी। इसका सचिवालय सेवा संघ व सचिवालय कर्मियों ने भारी विरोध किया। संघ दो एएसओ पर एक एसओ और दो एसओ पर एक अवर सचिव का पद ही रखने की मांग पर अड़ गया। कई दौर की बैठकों के बाद दो एएसओ पर एक एसओ के पद सृजित करने की मांग पर कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग सहमत हो गया। उसके बाद जब प्रस्ताव कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण किशोर के पास गया, तो उन्होंने फाइल पर विभागीय मंत्री (मुख्यमंत्री) की स्वीकृति लेने की टिप्पणी कर दी। वित्त सचिव करेंगे नई कमेटी को हेड मुख्यमंत्री ने वित्त सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाने का निर्देश दिया है। उसमें चार तरह के प्रमुख विभागों से सदस्यों को शामिल करने का भी सुझाव दिया है। अब समेकित रूप से विचार करने के बाद कमेटी सचिवालय अनुदेश में संशोधन की सिफारिश करेगा। उसके बाद फिर प्रस्ताव पर विधि, वित्त और मुख्यमंत्री की सहमति ली जाएगी। कैबिनेट में उसे रखा जाएगा और स्वीकृति मिलने के बाद सचिवालय अनुदेश में संशोधन संभव हो पाएगा।


