कृषि विभाग की आत्मा योजना में डिप्टी डायरेक्टर नियुक्ति के बाद पदस्थापन लंबित रहने के बाद विभागीय सचिव अबू बकर सिद्दिकी फाइल पर टिप्पणी की है। लिखा है कि मंत्री की मौजूदगी में नियुक्ति पत्र वितरण के बाद किसी तरह आपत्ति उठना चिंता का विषय है। डायरेक्टर स्तर से सभी दस्तावेजों की पुनः समीक्षा करने के लिए कहा है। बताते चलें कि राज्य के कृषि विभाग के एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी (आत्मा) में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर चयनित 12 अभ्यर्थियों की नियुक्ति पांच महीने से थमी हुई है। विभागीय मंत्री के सामने नियुक्ति पत्रों का वितरण हो चुका है।अभ्यर्थियों ने योगदान आवेदन भी दे दिया है। लेकिन जिला स्तर पर पदस्थापन आज तक नहीं हो पाया है। इससे अभ्यर्थियों में आक्रोश है। 14 जून को मंत्री की उपस्थिति में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए थे। इसके कुछ दिन बाद विभाग को एक छद्म नाम से शिकायत मिली, जिसमें कुछ अभ्यर्थियों के अंक एवं मेरिट पर सवाल उठाए गए थे। शिकायत मिलते ही चयनित अभ्यर्थियों के पद स्थापन से संबंधित प्रोसेस आगे नहीं बढ़ सका। मंत्री के सामने अभ्यर्थियों की नियुक्ति पत्र बांटने के बाद आपत्ति उठना चिंता का विषय है।
इसलिए डायरेक्टर स्तर से सभी डॉक्युमेंट की फिर से जांच की जाए। जिन अभ्यर्थियों के अंक या दस्तावेज विवाद रहित हैं, उनका पदस्थापन किया जा सकता है।
जिन अभ्यर्थियों के अंकों पर आपत्ति है, उनकी नियुक्ति अस्थायी रूप से रोकी जा सकती है। 20 जून को चयनित अभ्यर्थियों ने विभाग में योगदान हेतु आवेदन दे दिया था।अभ्यर्थियों का कहना है कि हमने सभी निर्देशों का पालन किया, दस्तावेज जमा किए, योगदान भी दिया। फिर भी 5 महीने से फाइल प्रोसेस में बताकर टाल दिया जाता है। यह समझ से परे है। नियुक्ति प्रक्रिया पर नजर रखने वाले एक अधिकारी ने बताया कि पदस्थापन से संबंधित प्रस्ताव निदेशालय से सचिवालय भेजा गया था, लेकिन वहां फाइल अनुमोदन की प्रतीक्षा में रुकी हुई है। कृषि विभाग के एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट (आत्मा) में डिप्टी डायरेक्टर नियुक्ति मामले में अभी कुछ नहीं बता सकते। फाइल देखने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। -भोर सिंह यादव, कृषि विभाग के निदेशक जून में मंत्री के हाथों दिया गया था नियुक्ति पत्र।


