सजा सुनाने पहली बार रात 8 बजे तक लगी कोर्ट:आरक्षक भर्ती घोटाला: परीक्षार्थी, सॉल्वर को कोर्ट ने सुनाई 7 साल की सजा

व्यापमं के आरक्षक भर्ती घोटाले में सजा सुनाने के लिए शुक्रवार को पहली बार कोर्ट रात 8 बजे तक लगी। जज ने तय कर लिया था कि आज फैसला सुनाकर ही कोर्ट से जाएंगे। विशेष सत्र न्यायालय ने मूल परीक्षार्थी और उसके बदले परीक्षा में बैठने वाले सॉल्वर को 7-7 साल की सजा सुनाई है। उन पर 12-12 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। देर तक कोर्ट लगने की वजह आरोपियों का रास्ते में होना था। आरोपियों के कोर्ट में हाजिर होते ही सजा सुनाने में सिर्फ 15 मिनट लगे। ग्वालियर में आरक्षक भर्ती फर्जीवाड़ा में दोषी हरवेंद्र चौहान उर्फ प्रवेंद्र निवासी जयपुर राजस्थान है, जबकि रणवीर सिंह सुजानपुर आगरा का रहने वाला है। अदालत हरवेंद्र की पेशी का इंतजार करते हुए रात आठ बजे तक सुनवाई में बैठी रही। आरोपियों के वकील ने बार-बार कोर्ट को उनके रास्ते में होने की जानकारी दी। करीब तीन घंटे के इंतजार के बाद जब आरोपी कोर्ट पहुंचा, तो अदालत ने फैसला सुना दिया।
पहली बार व्यापमं में कठोर सजा मिली
ऐसा पहली बार हुआ है जब व्यापमं घोटाला से जुड़े किसी प्रकरण में सात वर्ष की कठोर सजा दी गई है। इससे पहले इन मामलों में अधिकतम सजा पांच वर्ष तक ही दी जाती रही थी। कोर्ट ने इस धोखाधड़ी को सुनियोजित बताया। न्यायालय ने कहा कि वास्तविक परीक्षार्थियों की जगह अन्य व्यक्तियों को बैठाने की योजना व्यवस्थित तरीके से बनाई जाती है और यहां भी बनाई गई थी। चूंकि यह एक मान्यता प्राप्त परीक्षा थी, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी को गंभीर अपराध माना जाएगा।
फोटो और हस्ताक्षर मिस मैच से हुआ खुलासा
बता दें कि यह मामला 30 सितंबर 2012 का है। जब आरक्षक भर्ती परीक्षा में परीक्षार्थी रणवीर सिंंह की जगह हरवेन्द्र सिंह उर्फ प्रवेन्द्र सिंह चौहान बैठा था। परीक्षा केंद्र पर ड्यूटी कर रही एक शिक्षिका ने जब देखा कि परीक्षार्थी और उसके फार्म में फोटो और हस्ताक्षर मिस मैच हैं तो उसने केंद्र अध्यक्ष को सूचना दी। जिसके बाद पूछताछ के बाद यह मामला पकड़ में आया था। जिसके बाद मामला दर्ज कर चालान कोर्ट में पेश किया गया।
फैक्ट फाइल

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *