भास्कर न्यूज | अमृतसर मिनी सचिवालय स्थित फूड एंड सिविल सप्लाई विभाग के दफ्तर में बुधवार को प्रशासनिक लापरवाही देखने को मिली। विभाग के डीएफएससी, डीएफएसओ, एएफएसओ, क्लेरिकल दफ्तर पर सारा दिन ताले लटके रहे जिस काम करवाने के लिए पहुंचे लोगों को वापस लौटना पड़ा। सारा दिन दफ्तर में सन्नाटा छाया रहा। जिन कमरों पर ताले नहीं लगे थे, वहां भी अंदर कोई नहीं था। पूरे दफ्तर में केवल एक सेवादार ही था, जो डीएफएससी कार्यालय के बाहर बैठा नजर आया। साफ है कि सारा दफ्तर सेवादार के हवाले ही कर दिया गया। सेवादार से अन्य कर्मचारियों की अनुपस्थिति के बारे में पूछा गया तो बताया कि ‘साहब की बेटी की शादी है, इसलिए शायद सभी वहीं गए हैं।’ हालांकि वह शादी की तारीख या स्वीकृत सामूहिक छुट्टी के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे सका। सूत्रों के मुताबिक डीएफएससी की बेटी की शादी जनवरी में प्रस्तावित बताई जा रही है, इसके बावजूद विभाग का कामकाज कई दिन पहले ही प्रभावित हो गया है। बता दें कि उक्त दफ्तर में पिछले 5-6 दिन से भी अधिकांश कर्मचारी नियमित रूप से दफ्तर नहीं आ रहे हैं। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ता आ रहा है। राशन कार्ड से जुड़े मामलों, नए डिपो अलॉट करने संबंधी कई मामले संबंधी लोग जानकारी लेने के लिए पहुंच रहे थे, लेकिन वह लोग बार-बार लौटने को मजबूर हैं। गांव जसराऊर से आए जसविंदर सिंह का कहना था कि उन्होंने विभाग की तरफ से डिपो होल्डर की निकली वैकेंसी के बारे अप्लाई किया था। उस बारे विभाग ने आगे क्या किया है, उस बारे पता करने के लिए पहुंचे थे। उनका गांव काफी दूर है तो बार-बार नहीं आया जाता। उन्होंने कहा कि आज स्पैशल इसलिए ही यहां आए थे, लेकिन दफ्तर में कोई नहीं मिला। सेवादार बैठा हुआ था, उससे पूछा भी स्टाफ कहा गया है तो नहीं बताया कि स्टाफ कहां पर गया हुआ है। उन्होंने कहा कि इतना बड़ा विभाग और दफ्तर में कोई भी नहीं है, यह बहुत ही हैरानी वाली बात है। दैनिक भास्कर टीम सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची तो पाया कि विभाग के लगभग सभी कमरों पर ताले लटके हुए थे और पूरा कार्यालय व्यावहारिक रूप से बंद था। यह पहली बार नहीं है जब फूड एंड सिविल सप्लाई विभाग का दफ्तर इस तरह मिला हो। इससे पहले भी रिटायरमेंट पार्टी, किसी अधिकारी या कर्मचारी के पारिवारिक कार्यक्रम और निजी आयोजनों के चलते पूरा स्टाफ दफ्तर खाली छोड़ चुका है। मगर हैरानी की बात यह है कि इस मामले में आज तक न तो जिला प्रशासन ने इस तरफ ध्यान दिया और न ही विभाग के उच्चाधिकारियों ने। हालांकि इस बिल्डिंग में ही डिप्टी कमिश्नर सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के दफ्तर है। विभाग के एक अधिकारी के दफ्तर पर तो कई महीनों से ही ताला लगा हुआ है। बताया जाता है कि वह अपना सारा काम दफ्तर की बजाय घर पर ही निपटाते हैं। आरटीआई एक्टीविस्ट विशाल जोशी का कहना है कि उक्त विभाग की लापरवाही अकसर ही सामने आती रहती है, लेकिन इन पर कोई जवाबदेही ही नहीं है। यहीं कारण है कि इनकी एक आदत सी बन गई है कि लोगों को परेशान किया जाए। इन्हें पूछने वाला भी कोई नहीं है। डीएफएसओ महिंदर अरोड़ा से बात की गई तो उनका कहना था कि वह ऑन डयूटी पर थे। विभिन्न जगहों पर गोदामों की फिजिकल वेरिफिकेशन होनी थी, इसलिए वह वहां गए हुए थे। उन्होंने कहा कि 31 दिसंबर को सभी गोदामों की पीवी होनी होती है, इसलिए उसी डयूटी के लिए वह गोदामों में गए हुए थे। वहीं डीएफएससी अमनजीत सिंह संधू ने तो फोन हीं नहीं उठाया। x


