सड़क निर्माण में बाधक बनीं जमीन की समस्याएं सुलझाने में जुटी सरकार

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के पत्र के बाद राज्य सरकार रेस हो गई है। सड़क परियोजनाओं में आ रहीं समस्याओं को सुलझाने के लिए तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी गई है। शुक्रवार को जमीन संबंधी समस्याओं, मुआवजा वितरण और अन्य विवादों को निपटाने के लिए शीर्ष स्तर पर बैठक हुई। इसमें पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव चंद्रशेखर, भू-राजस्व निदेशक भोर सिंह यादव व एनएचएआई के अधिकारी शामिल थे। बैठक दो शिफ्ट में हुई। एक शिफ्ट में पथ निर्माण विभाग की जमीन से जुड़ी परियोजनाओं और दूसरे शिफ्ट में एनएचएआई से जुड़ी परियोजनाओं पर चर्चा की गई। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पथ निर्माण और एनएचएआई की एक-एक परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। उसमें जमीन अधिग्रहण के कारण कौन से परियोजना फंसी हुई है, मुआवजे का भुगतान नहीं होने के कारण कहां सड़क निर्माण में बाधा आ रही है और कहां कहां अभी भू-अधिग्रहण की प्रक्रिया ही प्रारंभ नहीं हो सकी है, इस पर विचार किया गया। सभी जिलों के उप समाहर्ताओं को इन समस्याओं का तत्काल समाधान निकालने का निर्देश दिया गया। भू अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में तेजी लाने का भी आदेश िदया गया। साथ व्यक्तिगत इंटरेस्ट लेकर इन समस्याओं को अविलंब दूर करने का सुझाव दिया गया। समीक्षा के क्रम में जहां जहां मुआवजा वितरण के लिए राशि उपलब्ध करा दिया गया है, लेकिन मुआवजे का वितरण नहीं हो सका, उसे काफी गंभीरता से लिया गया। गडकरी ने बताई, कहां-क्या है परेशानी नितिन गडकरी ने सीएम को लिखे पत्र में सड़क निर्माण में आ रहीं बाधाओं की जानकारी दी है। बताया है कि झारखंड में 15 हाइवे प्रोजेक्ट जमीन अधिग्रहण, मुआवजा वितरण व फॉरेस्ट क्लीयरेंस के कारण प्रभावित हो रहा है। इस सभी परियोजनाओं की लागत 21 हजार 690 करोड़ है। 588 किलोमीटर लंबी सड़क के 172 किलोमीटर लंबाई में फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं मिल रहा है। कुड़ू से उदयपुरा (लातेहार), उदयपुरा से भोगू सेक्शन(लातेहार), भोगू से शंखा (पलामू) और बासुकीनाथ से देवघर( देवघर) के बीच भी फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं मिल रहा है। इसी तरह वाराणसी कोलकाता एक्सप्रेस वे के तहत चतरा बाईपास (चतरा), देवरिया से दोनोरेशान (चतरा-हजारीबाग), दोनोरेशान से बोंगाबार पैकेज( हजारीबाग-रामगढ़), बोंगाबार से लेपो पैकेज( रामगढ़-बोकारो), लेपो से कमलापुर पैकेज( बोकारो) में भी फॉरेस्ट क्लीयरेंस आड़े आ रहा है। इसके अलावा नयी सड़क परियोजना के तहत देवघर बाईपास, गुमला बाईपास, केरेटया से क्योंदपानी, क्योंदपानी से लतरा और लतरा से सीठियो के बीच फॉरेस्ट क्लीयरेंस का पेंच फंसा हुआ है। एनएचएआई के 15 और पथ निर्माण के 12 से अधिक प्रोजेक्ट प्रभावित मालूम हो कि पिछले दिनों केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिख कर जमीन अधिग्रहण, मुआवजे का वितरण और फॉरेस्ट क्लियरेंस के कारण प्रभावित हो रही एनएचएआई की सड़क परियोजनाओं की अड़चनों को अविलंब दूर करने का आग्रह किया था। उसमें उन्होंने लगभग 15 सड़क परियोजनाओं का विस्तार से जिक्र किया था। इधर जानकारी के अनुसार राज्य के विभिन्न जिलों में राज्य के पथ निर्माण विभाग की भी लगभग एक दर्जन से अधिक योजनाएं प्रभावित है।

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