सतना में विवादित ढांचा हटाने को लेकर हंगामा:VHP-बजरंग दल के 200 कार्यकर्ता पहुंचे, पुलिस ने रोका; प्रशासन के आश्वासन पर माने

सतना जिले के धारकुंडी थाना क्षेत्र के झखौरा गांव में मंगलवार शाम तनाव की स्थिति बन गई। यहाँ एक मकान में बने विवादित ढांचे को हटाने की मांग को लेकर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल के 200 से अधिक कार्यकर्ता महापंचायत करने पहुंचे थे। कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए विवादित ढांचे की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मौके पर पहले से तैनात पुलिस बल ने उन्हें 200 मीटर पहले ही रोक लिया। प्रशासन द्वारा कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शनकारी शांत हुए। प्रशासन बोला- नोटिस जारी कर दिया है, जल्द हटाएंगे
मौके पर तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (देहात) प्रेमलाल कुर्वे और मझगवां एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर ने प्रदर्शनकारियों से सीधी बातचीत की। अधिकारियों ने बताया कि प्राथमिक जांच के बाद निर्माण स्थल को हटाने के लिए नोटिस जारी किया जा चुका है और नियमों के तहत शीघ्र ही अगली कार्रवाई की जाएगी। आश्वासन मिलने के बाद विहिप-बजरंग दल के कार्यकर्ता सभा स्थल पर लौट गए। वहां करीब दो घंटे तक संबोधन और चर्चा के बाद महापंचायत समाप्त हो गई। बता दें कि इस कार्यक्रम से एक दिन पहले ही एसडीएम ने विवादित ढांचे को सील कर नोटिस तामील करा दिया था। सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात, सुपर-30 दस्ता भी मौजूद
कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। एएसपी प्रेमलाल कुर्वे के साथ चित्रकूट एसडीओपी राजेश बंजारे, सभापुर टीआई शंखधर द्विवेदी, चित्रकूट टीआई गिरजा शंकर बाजपेयी, बरौंधा टीआई अभिनव सिंह, मझगवां टीआई आदित्य नारायण धुर्वे और धारकुंडी थाना प्रभारी शैलेंद्र पटेल मोर्चे पर डटे रहे। इसके अलावा पुलिस लाइन से सुपर-30 का दस्ता भी विशेष रूप से तैनात किया गया था। डेढ़ दशक पहले हुआ था धर्मांतरण, मुंबई से आए 9 लाख रुपए
यह पूरा मामला लालमन चौधरी के धर्मांतरण से जुड़ा है। उसने करीब 15 साल पहले धर्म परिवर्तन किया था। बाद में उसने अपने बेटे विजय भारती उर्फ मोहम्मद उमर (32) और रिश्ते के भतीजे दीनानाथ चौधरी उर्फ अब्दुल्ला (42, निवासी रनेही, थाना कोठी) का भी धर्मांतरण करा दिया। इनकी संदिग्ध गतिविधियां सामने आने पर पुलिस ने तीनों के खिलाफ मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 3 और 5 के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपियों के पास पिछले एक साल के भीतर मुंबई से 9 लाख रुपए आए हैं, जिसकी अलग से पड़ताल की जा रही है।

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