भास्कर संवाददाता | टोंक जिले की 1500 से ज्यादा सरकारी स्कूलों को स्पोर्ट्स ग्रांट राशि का इंतजार है, जबकि सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र समाप्त होने में अब केवल दो माह का समय बचा है। शारीरिक शिक्षकों का कहना है कि सत्र के शुरुआत में मिलने वाली स्पोर्ट्स ग्रांट अब तक जारी नहीं की गई है। आश्चर्य की बात ये है कि शिक्षा विभाग की ओर से यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि स्कूलों को बजट आवंटित होगा या फिर स्पोर्ट्स किट मिलेगी। स्पोर्ट्स ग्रांट नहीं मिलने से स्कूलों में खेल गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। शारीरिक शिक्षक और विद्यार्थी अपने संसाधनों से खेल सामग्री की व्यवस्था करने को मजबूर हैं। पिछले वर्ष राज्य स्तर से वितरित की गई खेल सामग्री की गुणवत्ता को लेकर प्रदेशभर में शारीरिक शिक्षकों की ओर से नाराजगी भी जताई गई थी। स्पोर्ट्स ग्रांट बजट में हो रही देरी से जिले के खिलाड़ियों और शारीरिक शिक्षकों में निराशा है। शारीरिक शिक्षक संघ ने जल्द बजट जारी करने की मांग की है। जिले में 1516 सरकारी स्कूल हैं। इनमें प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व सीनियर स्तरीय स्कूल शामिल हैं। शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि सरकार के निर्देश का इंतजार है। बजट मिलेगा या सीधे खेल सामग्री आएगी। पिछले साल स्पोर्ट्स किट की गुणवत्ता पर उठे थे सवाल सरकार ने सरकारी स्कूलों को साल 2025 में स्पोर्ट्स ग्रांट राशि देने के बजाय प्रत्येक स्कूल को खेल किट उपलब्ध कराई थी। जिले के शारीरिक शिक्षक संघ से जुड़े प्रदेश संगठन मंत्री रमेश खटीक, पूर्व जिलाध्यक्ष रामलाल जाट समेत पदाधिकारियों ने इन किटों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद प्रदेशभर में रोष फैल गया था। खेल किट भेजने से पहले स्कूलों के प्रधानाचार्यों या शारीरिक शिक्षकों से यह नहीं पूछा गया कि उन्हें किन खेलों की सामग्री की आवश्यकता है। इसका सबसे अधिक नुकसान उन स्कूलों को हुआ, जहां शारीरिक शिक्षक विद्यार्थियों को चुनिंदा खेलों में विशेष प्रशिक्षण दिला रहे हैं। इस स्थिति से नाराज शारीरिक शिक्षकों ने मांग की थी कि खेल सामग्री का बजट सीधे स्कूल स्तर पर जारी किया जाए, ताकि विद्यालय अपनी आवश्यकता के अनुसार गुणवत्तापूर्ण खेल सामग्री खरीद सकें। इस बजट का है प्रावधान स्कूलों के लिए स्पोर्ट्स ग्रांट के तहत प्रति वर्ष खेल सामग्री खरीदने के लिए बजट दिया जाता था। इसमें प्राथमिक स्तर तक की स्कूल के लिए 5 हजार रुपए, उच्च प्राथमिक स्तर 10 हजार और सीनियर सेकंडरी स्कूलों के लिए 25 हजार रुपए का बजट शामिल है। स्कूल के शारीरिक शिक्षक और प्रधानाचार्य आदि मिलकर क्रय समिति का गठन करते थे। भौतिक परिवेश और छात्रों की रुचि के खेलों की सामग्री खरीदते थे। जिनका बच्चे भी उपयोग करते थे।


