सिटी रिपोर्टर | रांची पाणिनि कन्या महाविद्यालय बनारस की प्राचार्य नंदिता शास्त्री का कहना है सनातन तभी तक जीवित है जब तक आर्य समाज की विचारधारा जीवित है। उन्होंने कहा कि मनुस्मृति मानव जाति का वेद के अनुकूल संविधान है, उसके अनुसार समान आकृति वाला व्यक्ति एक जाति वर्ण विशेष का है। यह विचार वे शनिवार से शुरू हुए दो दिवसीय आर्य समाज के वार्षिक उत्सव की शुरुआत करते हुए व्यक्त किए। श्रद्धानंद रोड स्थित आर्य समाज मंदिर में आयोजित वार्षिकोत्सव में आचार्य नंदिता शास्त्री ने कहा कि वर्ण अलग-अलग है, जो जैसा चाहे बन जाए, आप एक बने नेक बने तभी सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने कहा कि आज वेदों के अलग-अलग अर्थ कर दिए जा रहे हैं जो गलत था उसे सही अर्थ बताया स्वामी ऋषि दयानंद ने। कोलकाता से आए आचार्य योगेश शास्त्री ने कहा कि समाज की सभी समस्याओं की जड़ संस्कारहीनता है। पटना से आए भजनोपदेशक सत्य प्रकाश और वाराणसी की ब्रह्मचारिणी छात्राओं ने मधुर वाणी में भजन प्रस्तुत किए। पाणिनि कन्या महाविद्यालय बनारस की ब्रह्मचारिणी छात्राओं के साथ प्राचार्य नंदिता शास्त्री ने वेद मित्रों के साथ यज्ञ संपन्न कराया। इस अवसर पर आर्य समाज रांची की संरक्षिका सुशील गुप्ता के अलावा प्रेम प्रकाश, आर्य राजेंद्र आर्य, अजय आर्य, संजय पोद्दार, सुनील गुप्ता समेत बड़ी संख्या में आर्य समाज के श्रद्धालु सदस्य भी मौजूद थे। आयोजकों द्वारा दोपहर और रात में ऋषि लंगर का आयोजन किया गया।


