सफाई-अंधेरा अहम मुद्दा, महिलाएं बोलीं- दिक्कतें दूर करें

भास्कर न्यूज | जालंधर निगम चुनाव के लिए प्रचार शुरू हो गया है। प्रत्याशियों के लिए उनके पारिवारिक सदस्य भी वोट की अपील कर रहे हैं। वहीं, लोगों को समस्याओं से निजात दिलाने के लिए अलग- अलग वादे कर रहे हैं। निगम हाउस भंग होने के कारण लगभग दो साल से यहां पार्षद नहीं है। दैनिक भास्कर ने शनिवार को महिला आरक्षित वार्ड-7 का दौरा किया। लोग समस्याएं दूर न होने के कारण खफा हैं। वे बोले- नेता काम तो कर देते हैं, लेकिन इनका स्थायी हल नहीं है। सीवरेज जाम, स्ट्रीट लाइटें बंद, गंदगी, टूटी सड़कें यहां प्रमुख समस्याएं हैं। महिलाएं भी समस्याओं से जूझ रही हैं। पहले यह वार्ड-9 था। इलाके की महिलाएं बोलीं कि यहां पानी की पाइपें 30 साल पुरानी हैं। इस वार्ड में कोट रामदास आबादी, डॉ. बीआर अंबेडकर नगर, पटेल नगर, प्रीत नगर, संगम विहार, पंजाब एवेन्यू और गुलमर्ग एवेन्यू इलाके आते हैं। गली में रोज सफाई सेवक नहीं आता, कूड़ा उठाने वाले 100 रुपए लेते हैं सीवरेज बड़ी समस्या, स्ट्रीट लाइटें भी नहीं जलतीं कोट रामदास अबादी की रहने वाली 50 वर्षीय पिंकी देवी कहती हैं कि उन्हें विधवा पेंशन तो मिलती है, लेकिन पति की मौत के बाद घर बनाने के लिए जो राशि निगम से मिलनी थी, उसकी किस्तें बंद हो गई हैं। स्ट्रीट लाइटें भी बंद रहती हैं। सफाई की भी दिक्कत हैं। पार्षद की बजाय उनके पति ही मिलते हैं। घर के बाहर जमा रहता है सीवरेज का पानी चुनाव आए तो सफाई करने आए मुलाजिम… सत्या देवी कहती हैं कि गली में रोजाना सफाई के लिए कोई नहीं आता। न ही कोई झाड़ू लगाने आता है। अब चुनाव के कारण दो-चार दिन पहले ही सफाई वाले आए थे और गली में झाड़ू लगाकर गए हैं। जो लोग घर से कूड़ा लेने आते हैं, वे भी पैसे लेते हैं। हर महीने उनको 100 रुपए देने पड़ते हैं। रात में बाहर निकलने में बच्चों को ही नहीं, बड़ों को भी डर लगता है। वार्ड-7 में रहने वाली 60 वर्षीय कुलविंदर कौर कहती हैं कि यहां सीवरेज सबसे बड़ी समस्या है। स्ट्रीट लाइटें भी नहीं जलतीं। इस कारण काफी परेशानी होती है। रात में कहीं बाहर जाने में भी डर लगता है। सर्दियों में धंुंध के दिनों में काफी परेशानी होती है। इलाके में बंद स्ट्रीट लाइटें। लोगों की मांग- पहले इन्हें ठीक करवाया जाए। 65 वर्षीय बिमला देवी कहती हैं कि हमारे घर के बाहर सीवरेज का पानी खड़ा रहता है। पिछले शनिवार पति का निधन हुआ तो सारे रिश्तेदारों‌ को सीवरेज के पानी में से निकल कर घर तक आना पड़ा। हमने पार्षद को कहा तो उन्होंने कर्मचारियों को भेजकर सरिया डलवाया तो पानी निकला है। पानी की सारी पाइपें पुरानी हो गई है। डर है कि किरया वाले दिन दोबारा समस्या न आए ।

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