छत्तीसगढ़ में किसान खेती में लगातार नवाचार करने के साथ ही नई तरह की फसलें भी ले रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं सुरखी भाटापारा के प्रगतिशील किसान अजय कुमार नत्थानी। वे सफेद चंदन, महोगनी और मिलिया डूबिया की खेती कर रहे हैं। सिविल इंजीनियरिंग में बीई रहे नत्थानी जल संसाधन विभाग से ईई के पद से रिटायर हुए। इसके बाद उन्होंने आर्गेनिक खेती की दिशा में खुद को मोड़ लिया। वे 5 एकड़ में बेहद कीमती और उपयोगी पेड़ों की आर्गेनिक खेती कर रहे हैं। किसान अजय नत्थानी बताते हैं कि वे आधुनिक खेती और नई तरह की फसलों के बारे में काफी सामग्रियां पढ़ा करते थे। इसके अलावा वे कृषि विभाग के उच्च अधिकारियों के संपर्क में भी थे। इसी दौरान वे सफेद चंदन, महोगनी और मिलिया डूबिया की खेती के लिए प्रेरित हुए। ये पौधे 10-12 साल में पेड़ बनकर काटने लायक हो जाते हैं। अभी ये करीब 5 साल के हैं। वे सागौन की भी खेती कर चुके हैं। 25 साल पहले उन्होंने जो सागौन लगाए थे, उन्हें काटकर बेच चुके हैं। अब उस जगह पर वे काली मिर्च की सफल खेती कर रहे हैं। आमतौर पर इसकी फसल दक्षिण भारत में ली जाती है। नत्थानी ने बताया कि सफेद चंदन खुद की जड़ों की जगह दूसरे पौधे की जड़ों से भोजन लेते हैं। उन्होंने सफेद चंदन के भोजन के लिए मिलिया डूबिया लगाया है। पौधे पांच-पांच फीट की दूरी पर लगाए हैं। यानी सफेद चंदन से पांच फीट की दूरी पर मिलिया डूबिया। पौधों की पंक्तियों के बीच की दूरी 10 फीट है। पांच एकड़ में उन्होंने सफेद चंदन के 1400, महोगनी के 1000 और मिडिया डूबिया के 400 पौधे लगाए हैं। वे इंटर क्रॉपिंग भी कर रहे हैं। यानी पेड़ों की दो पंक्तियों के बीच खाली जगह पर वे दूसरी फसल के रूप में सरसों और गेहूं ले रहे हैं। इंटर क्रॉपिंग में उत्पादन अच्छा आता है। वे बताते हैं कि सफेद चंदन बेहद कीमती पेड़ है। ऑयल कंटेंट वाले इस पेड़ में जितना ज्यादा ऑयल कंटेंट हो, उसे उतना ही कीमती माना जाता है। इसकी कटाई से लेकर बिक्री तक का पूरा काम वन विभाग ही करता है। आमतौर पर जब पेड़ में ऑयल कंटेंट 4.5 से 6.5 प्रतिशत हो तो उसे काट सकते हैं। एक पेड़ में ऑयल कंटेंट वाला लगभग 20 किलो हार्ट वुड निकल जाता है, जिसकी आज बाजार में कीमत लगभग 2.44 लाख है। इसकी सप्लाई विदेशों में है। महोगनी सागौन से भी ज्यादा सख्त और कीमती लेकिन हल्की होती है। बंदूक का बट इसी से बनता है। सामान्य लकड़ी की लाठी का वजन 600 से 700 ग्राम होता है, इससे बनी लाठी 200 ग्राम की होती है। महोगनी की मांग पूरे देश में है। इसका अच्छा फर्नीचर भी बनता है। एक पेड़ की कीमत 80 हजार से एक लाख रुपए तक होती है। फार्म में मिलिया डूबिया एक बॉय प्रोडक्ट है। इसकी परतदार लकड़ी पैकेजिंग आदि के काम आती है। सभी जगह इसकी मांग है। हरा पेड़ ही हाथों हाथ बिक जाता है। इससे प्लाई वुड भी बनता है। एक पेड़ में करीब 10 हजार की लकड़ी निकल आती है। जहां तक सवाल इन कीमती पेड़ों की खेती पर खर्च का है, तो पूरे पांच एकड़ की फार्मिंग में उन्हें एक लाख रुपए प्रति एकड़ की लागत आई। इसमें ड्रिप एरिगेशन, खाद और पौधों की कीमत शामिल है। इसके अलावा पौधों के रखरखाव और खाद पर करीब 10 हजार रुपए प्रति एकड़ का खर्च सालाना आता है। —————— (इन प्रगतिशील किसान से और जानें- 9826118220)


