सफेद चादर में लिपटा कुचामन:ओस ने खिलाए किसानों के चेहरे, ​खेती के लिए संजीवनी बनी साल के आखिरी दिन की ओस; सड़कों पर रेंगते नजर आए वाहन

साल 2025 के अंतिम दिन यानी आज बुधवार को कुचामन सिटी और आसपास के ग्रामीण इलाकों में मौसम ने जबरदस्त पलटा खाया है। कड़ाके की ठंड के बीच आज सुबह सीजन की पहली घनी ओस और कोहरा गिरने से पूरा इलाका सफेद चादर में लिपटा नजर आया। लंबे समय से सूखी ठंड और धूप का सामना कर रहे किसानों के लिए साल का यह आखिरी दिन बड़ी राहत लेकर आया है। विशेषज्ञों और स्थानीय किसानों का मानना है कि आज की यह ओस रबी की फसलों के लिए ‘अमृत’ के समान है, जिससे फसलें रोगों से मुक्त होंगी और उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। ​सुबह से ही छाया घना कोहरा इतना गहरा था कि सड़कों पर दृश्यता शून्य के करीब पहुंच गई। इसके चलते जयपुर-नागौर हाईवे सहित ग्रामीण संपर्क मार्गों पर वाहनों के पहिए थम से गए। वाहन चालकों को दिन के उजाले में भी हेडलाइट्स जलाकर बेहद धीमी गति से चलना पड़ा। सर्दी और ठिठुरन के चलते आम जनजीवन भी पूरी तरह प्रभावित रहा। लोग सुबह देर तक घरों में दुबके रहे और अलाव जलाकर ठंड से बचने का जतन करते नजर आए। 31 दिसंबर होने के कारण जहां लोग नए साल के स्वागत की तैयारियों में जुटे हैं, वहीं इस कड़ाके की सर्दी ने उत्सव के उत्साह के बीच ठिठुरन बढ़ा दी है। ​खेती की बात करें तो गोपालपुरा, सुजानपुरा, जिलिया, और चितावा सहित आसपास के दर्जनों गांवों में बुवाई कर चुके किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। ग्रामीण परसाराम बुगालिया ने बताया कि इस बार सर्दी के सीजन के करीब 2 महीने बीतने के बाद भी वैसी ठंड नहीं थी जैसी उम्मीद की जा रही थी, लेकिन आज गिरी भारी ओस ने जौ, गेहूं, सरसों और चना जैसी फसलों को नई जान दे दी है। कृषि जानकारों का कहना है कि यदि ओस और ठंड का यह दौर जनवरी और फरवरी तक जारी रहता है, तो इस बार रबी की फसल का उत्पादन पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ सकता है। साल के अंतिम दिन हुए इस सुखद मौसमी बदलाव ने किसानों के लिए नए साल की खुशियों को दोगुना कर दिया है।

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