2021 में चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने धमाकेदार एंट्री की थी। AAP ने 35 में से 14 वार्डों में चुनाव जीत लिया। वह निगम हाउस की सबसे बड़ी पार्टी बनी। दूसरे नंबर पर 12 पार्षदों के साथ भाजपा और 8 पार्षदों के साथ कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही। मगर, हर साल मेयर के चुनाव में BJP ने जोड़तोड़ का ऐसा सियासी दांव-पेंच चला कि AAP उसमें उलझकर रह गई। 4 साल में AAP सिर्फ एक ही बार अपना मेयर बना पाई, उसके लिए भी सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़नी पड़ी। बाकी तीनों बार BJP अपना मेयर बनाती चली गई। इस बार भी 29 जनवरी को चुनाव होने हैं। लेकिन जिस तरह की स्थिति अभी तक बनी हुई है, उसमें भी AAP को झटका लगना तय माना जा रहा है। हालांकि अभी गठबंधन तोड़ चुके AAP और कांग्रेस वोटिंग के दिन साथ आ गए तो BJP मुश्किल में फंस सकती है। 2021 में वोटिंग का रिकॉर्ड टूटा
24 दिसंबर 2021 को जब चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव हुए थे, तो उस समय 60.45 फीसदी मतदान हुआ था। चंडीगढ़ 1996 में नगर निगम बना था, तब से लेकर अब तक यह सबसे अधिक मतदान का आंकड़ा था। कोरोना काल के बाद ये चुनाव हुए थे। तब संदेश भी साफ था कि इस बार लोगों ने बदलाव के नाम पर मतदान किया है। जब 27 दिसंबर को मतगणना हुई, तो वोटिंग का इम्पैक्ट भी दिखा। पहली बार 35 में से 14 सीटें जीतकर AAP सबसे बड़ी पार्टी बनी। 12 सीटों के साथ भाजपा दूसरे और कांग्रेस को 8 व शिरोमणि अकाली दल को एक सीट मिली। ऐसे में लगा कि चंडीगढ़ नगर निगम में बड़ा बदलाव होने वाला है। 30 दिसंबर 2021 को अरविंद केजरीवाल ने ऐतिहासिक रोड शो चंडीगढ़ में निकाला। जानिए, 4 बार कैसे BJP ने AAP को छकाया 2022 में BJP को किस्मत और कांग्रेस का साथ मिला
14 पार्षद जीतकर आम आदमी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनी। लेकिन पार्टी की असली परीक्षा इसके बाद शुरू हुई। चंडीगढ़ में नगर निगम का मेयर बनाने के लिए बहुमत का जादुई आंकड़ा 19 किसी के पास नहीं था। शुरुआत में बीजेपी के पास सांसद किरण खेर का भी वोट था। ऐसे में उनके पास 13 वोट हो गए। लेकिन तब भी वह AAP से पीछे थे। जब एक जनवरी 2022 को पार्षदों के शपथ समारोह की बारी आई, तो तत्कालीन कांग्रेस नेता देवेंद्र बबला और तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चावला के बीच कहासुनी हो गई। बबला ने चावला से कहा कि आपने एक और नेता के साथ मिलकर पार्टी डुबो दी। इसके बाद 2 जनवरी को देवेंद्र बबला अपनी पार्षद पत्नी हरप्रीत कौर बबला के साथ बीजेपी में शामिल हो गए। भाजपा और AAP के बराबर वोट हो गए। कांग्रेस ने AAP और भाजपा की सीधी टक्कर से दूरी बना ली और चुनाव में उनके 7 पार्षदों ने हिस्सा नहीं लिया। शिरोमणि अकाली दल ने भी मतदान में हिस्सा नहीं लिया। लेकिन जब बारी सीक्रेट वोटिंग की आई, तो भाजपा की सरबजीत को 14 वोट मिले और वह विजयी रहीं। क्रॉस वोटिंग, टाई और पर्ची से फैसला
आप की अंजू कत्याल को 13 वोट मिले। उनका एक वोट आइडेंटिफिकेशन मार्क होने के चलते इनवैलिड हो गया। जिस वजह से भाजपा जीत गई। सीनियर डिप्टी मेयर पद पर भाजपा के दलीप शर्मा 15 वोट लेकर विजयी रहे। पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग की। जब डिप्टी मेयर की बारी आई, तो भाजपा के अनूप और आप के रामचंद्र को 14-14 वोट मिले। न कोई क्रॉस वोटिंग हुई और न कोई वोट इनवैलिड हुआ। फिर सहमति से दोनों नामों की पर्ची बनाई गई। कमिश्नर ने पर्ची निकाली, जिसमें बीजेपी के उम्मीदवार की जीत हुई। हालांकि बाद में मामला कोर्ट तक गया। 2023 में कांग्रेस मतदान में शामिल नहीं हुई, न उम्मीदवार उतारा
2023 में जब मेयर चुनाव हुए, कांग्रेस की वजह से फिर भाजपा को बैनिफिट हो गया। कांग्रेस ने इस चुनाव का बायकॉट कर दिया। 2022 में 13 पार्षदों वाली भाजपा ने इस साल कांग्रेस का एक और पार्षद तोड़ लिया। जिसके बाद भाजपा के पास सांसद का वोट मिलाकर 15 वोट हो गए। चुनाव में कांग्रेस के 6 पार्षद और अकाली दल के एक पार्षद ने वोटिंग नहीं की। जिस वजह से कुल 29 वोट पड़े। जिसमें से भाजपा को 15 और AAP को 14 वोट मिले। भाजपा के अनूप गुप्ता ने AAP के जसबीर लाठी को सिर्फ एक वोट से हरा दिया। बाकी 2 पदों सीनियर डिप्टी मेयर पर कंवरजीत सिंह राणा और डिप्टी मेयर पर हरजीत सिंह की जीत हुई। ये भी भाजपा से ही थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठबंधन जीता
2024 का साल ऐसा रहा कि बीजेपी को जोड़तोड़ करके मात्र कुछ दिनों के लिए मेयर पद मिला। यह चुनाव कई वजहों से खास था। लोकसभा चुनाव होने वाले थे। राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का गठबंधन हो गया। ऐसे में यह गठबंधन का देश में पहला चुनाव था। यहां भी तय हो गया था कि आप को चंडीगढ़ का मेयर पद और कांग्रेस को सांसद मिलेगा। इससे बीजेपी के लिए खतरे की घंटी बज गई। 10 जनवरी को भाजपा ने AAP के किले में सेंध लगाते हुए पार्षद लखबीर बिल्लू को अपने दल में शामिल कर लिया। लेकिन 13 जनवरी को बीजेपी पार्षद गुरचरणजीत सिंह काला आप में शामिल हो गए। इससे बीजेपी के वोट 16 से घटकर 15 रह गए। बहुमत का आंकड़ा दूर नजर आने लगा। प्रिजाइडिंग अफसर अनिल मसीह 18 जनवरी को होने वाले चुनाव से ठीक पहले अस्पताल में भर्ती हो गए और चुनाव टाल दिए गए। छह फरवरी को चुनाव दोबारा करवाने का फैसला प्रशासन ने लिया। लेकिन गठबंधन ने इसका विरोध किया और हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने 30 जनवरी को चुनाव करवाने का आदेश दिया। 30 जनवरी को हुए चुनाव में AAP-कांग्रेस गठबंधन के पास 13+6 यानी 19 वोट थे, जबकि बीजेपी के पास सांसद समेत 15 वोट थे। चुनाव अधिकारी अनिल मसीह ने वोटिंग के वक्त गठबंधन के 8 वोट इनवैलिड कर दिए और बीजेपी के मनोज सोनकर को मेयर घोषित कर दिया। उन्हें 16 वोट मिले थे, जिनमें एक वोट शिरोमणि अकाली दल के पार्षद का था। बैलेट पेपर पर कुछ लिखते हुए मसीह का वीडियो वायरल हुआ, जो पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 19 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले रात साढ़े नौ बजे मेयर सोनकर ने इस्तीफा दे दिया। इससे पहले दिन में बीजेपी की पार्षद पूनम, नेहा और गुरचरणजीत भाजपा में शामिल हो गए। 20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला बदलते हुए आम आदमी पार्टी को कुलदीप कुमार के रूप में पहला मेयर दिलाया। 2025 में 3 क्रॉस वोट कर बीजेपी मेयर पद जीती
2025 में मेयर चुनाव के दौरान बीजेपी के 16 पार्षद थे। आप और कांग्रेस ने दोबारा मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया। सांसद इस बार कांग्रेस का था। ऐसे में गठबंधन के पास 20 वोट थे। लेकिन 27 जनवरी को बीजेपी ने कांग्रेस को झटका देते हुए पार्षद गुरबख्श रावत को बीजेपी में शामिल कर लिया। इसके बावजूद गठबंधन के पास बहुमत था। चुनाव से ठीक पहले आप के मेयर कुलदीप और उनके साले पर भ्रष्टाचार का केस दर्ज हुआ। 30 जनवरी को हुए चुनाव में बीजेपी की हरप्रीत कौर बबला मेयर बनीं। उन्हें 19 वोट मिले। 3 पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग की। वोटिंग से पहले बीजेपी के पास 16 वोट थे। हालांकि मेयर के बाकी 2 पदों पर गठबंधन की जीत हुई। सीनियर डिप्टी मेयर जसबीर बंटी 19 वोट लेकर जीते, जबकि बीजेपी की बिमला दुबे को 17 वोट मिले। डिप्टी मेयर पद पर भी 19 मत लेकर तरुणा मेहता विजयी रहीं। ये दोनों गठबंधन के उम्मीदवार थे। 2026 में गठबंधन टूटा, कांग्रेस और AAP ने अलग उम्मीदवार उतारे
2026 में इस बार मेयर चुनाव थोड़ा अलग है, क्योंकि इस बार चुनाव सीक्रेट वोटिंग के जरिए होना है। बीजेपी ने जीत के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी इस बार अलग-अलग चुनाव लड़ रही हैं। इसकी वजह चाहे कुछ भी बताई जाए। लेकिन दोनों दलों को पंजाब में आने वाले नगर निगम और विधानसभा चुनाव नजर आ रहे हैं। पंजाब इकाई के नेता पहले दिन से गठबंधन का विरोध कर रहे थे। इस बार आप की पार्षद सुमन शर्मा भाजपा में शामिल हो गईं। इसी बीच उनकी भाभी पर मोहाली में पर्चा दर्ज हुआ। आरोप है कि वह ड्यूटी पर नहीं जाती थीं। लेकिन वेतन ले रही थीं। पार्षदों की इस टर्म में चंडीगढ़ में पहली बार तीनों दलों ने नामांकन किया है। हालांकि माना जा रहा है कि कांग्रेस मेयर पद से और आम आदमी पार्टी सीनियर डिप्टी व डिप्टी मेयर पद से नामांकन वापस लेगी और एक-दूसरे के उम्मीदवारों को वोट देगी। इस समय बीजेपी के पास 18 वोट हैं। अगर आप और कांग्रेस एक-दूसरे का समर्थन करते हैं, तो उनके पास 17 पार्षद और एक सांसद का वोट मिलाकर 18 वोट हो जाएंगे। ऐसे में अगर मुकाबला टाई रहा, तो पर्ची से चुनाव का फैसला होगा। *******************
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