समाज के बारे में… बंगाली एसोसिएशन की स्थापना 2003 में विद्यासागर में की गई, वर्तमान में 51 सक्रिय सदस्य ।

समाज की योजनाओं के बारे में अधिक जानकारी के लिए अध्यक्ष दुर्गादास भंडारी 9304488701 पर संपर्क करें। भास्कर न्यूज | जामताड़ा झारखंड बंगाली एसोसिएशन की स्थापना वर्ष 2003 में विद्यासागर में की गई थी। वर्तमान में संगठन के 51 सक्रिय सदस्य हैं। इसका मुख्य उद्देश्य बांग्ला भाषा का प्रचार-प्रसार करना है। इस दिशा में संगठन ने गांव-गांव जाकर इच्छुक लोगों को जोड़ा और सरकारी विद्यालयों में निःशुल्क बांग्ला भाषा की पुस्तकें वितरित कीं। झारखंड बंगाली एसोसिएशन मातृभाषा बांग्ला के प्रचार-प्रसार के लिए उल्लेखनीय प्रयास किया है। इसके साथ ही, एसोसिएशन ने शिक्षा विभाग से बांग्ला भाषा के शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की है ताकि मातृभाषा धीरे-धीरे विलुप्त न हो। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए “झारखंड बंगाल उन्नयन समिति” नामक एक शाखा का भी गठन किया गया है। यह शाखा राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में कक्षा 1 से 5 तक बांग्ला शिक्षा अनिवार्य करने की दिशा में लगातार विभाग से अनुरोध कर रही है। अब तक “वर्ण परिचय भाग प्रथम एवं द्वितीय” की 10,000 से अधिक पुस्तकें निःशुल्क वितरित की जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त, हर रविवार को विद्यासागर और जामताड़ा में बांग्ला पाठशालाओं का आयोजन किया जाता है, जहाँ सैकड़ों बच्चे बांग्ला भाषा सीखने के लिए भाग लेते हैं। इस पहल का उद्देश्य न केवल बंगाली समुदाय को एकजुट करना है, बल्कि विविधता में एकता के संदेश को भी समाज में फैलाना है। समिति की यह पहल समाज में सकारात्मक संदेश दे रही है। समाज की स्वास्थ्य सेवाएं झारखंड बंगाली एसोसिएशन द्वारा समय-समय पर जरूरतमंद लोगों के लिए दवाइयों और आवश्यक किट का निःशुल्क वितरण किया जाता है। इसके साथ ही, महापुरुषों की जयंती, धार्मिक कार्यक्रमों एवं स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर रक्तदान शिविरों का भी आयोजन किया जाता है। हर वर्ष 10 से अधिक रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते हैं, जिनमें प्रत्येक शिविर से 100 से अधिक यूनिट रक्त संग्रहित किया जाता है। शिक्षा के क्षेत्र में योगदान झारखंड बंगाली एसोसिएशन द्वारा पाठशालाओं में बच्चों को निःशुल्क शिक्षा व पुस्तक वितरण किया जाता है। दलित और पिछड़ों के गांवों में भाषा, कविता, पेंटिंग व संगीत प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। प्रतिभागियों को पुरस्कृत कर शिक्षा के प्रति जागरूकता और प्रोत्साहन दिया जाता है। यह सेवा कार्य संगठन की सामाजिक प्रतिबद्धता और जनहित में किए जा रहे प्रयासों का प्रमाण है।

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