भास्कर न्यूज| टिटिलागढ़ महाशिव कथा के दूसरे दिन शनिवार को नीलकंठ महादेव के दिव्य स्वरूप, महामृत्युंजय मंत्र की अद्भुत महिमा और शिवरात्रि महोत्सव के आध्यात्मिक महत्व का वर्णन बड़े ही भावपूर्ण और सुमधुर ढंग से किया गया। डॉ. सर्वेश्वर जी ने कथा का ऐसा संगीतमय, रसपूर्ण और हृदयस्पर्शी प्रस्तुतीकरण किया कि समस्त श्रोता मंत्रमुग्ध हो उठे। भक्ति, ज्ञान और संगीत का ऐसा अनुपम संगम देखने को मिला, जिसने वातावरण को पूर्णतः शिवमय बना दिया। इस दिव्य अवसर पर लगभग 800 से 1000 श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर शिव कथा का रसपान किया। महाराज ने बताया कि भगवान शिव का नाम क्यों नीलकंठ पड़ा और समुद्र मंथन क्यों किया गया। भगवान शिव ने किस तरफ़ ब्रह्मांड की सृष्टि के लिए अर्धनारीश्वर का अवतार धारण कर ब्रह्मांड की रचना की। मार्तण्ड को कैसे अल्प आयु में दिव्य ब्रह्म ज्ञान प्राप्ति हुई और चन्द्रमा को अभिशाप मिलने के बाद कैसे चंद्र शिवजी की जटा में शीर्ष पर विराजमान है, उसकी कथा पर प्रकाश डाला। सर्वेश्वर महाराज ने अपने कथा के माध्यम से बताया कि महादेव की भक्ति करने वाला यह भारत देश, जहां आज इतने गरीब लोग रहते हैं, उन गरीब लोगों के लिए हमारे हृदय में दया नहीं उमड़ती। हमारे खुद का बेटा बीमार हो जाए, हमें रातों की नींद उड़ जाती है, लेकिन कितने गरीब लोग ऐसे हैं जिन्हें दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होती। आज भारत में एक ऐसा वर्ग है जिसकी थाली में इतना है कि उस झूठन को वो कूड़ेदान में फेंकता है, और एक वर्ग ऐसा भी है जो उसी कूड़ेदान में से चुन-चुनकर खाता है, हमारा ह्रदय नहीं पसीजता। समाज कल्याण करने के लिए यदि अपना स्वार्थ का गला घोटना पड़े तो घोट दीजिए। मत भूलिए, भगवान कृष्ण गीता में कहते हैं, जो मुझे सब प्राणियों में एक समान भाव से देखता है, वो मेरी दृष्टि से कभी ओझल नहीं होता। मैं सदा उसे अपने हृदय में बसाकर रखता हूं, जो समाज के कल्याण के लिए आगे बढ़ता है। इसलिए दया का भाव अपने अंदर रखना सीखें। प्रेम, सहानुभूति, त्याग, शिक्षा के गुण अपने जीवन के अंदर लेकर आएं। समाज की रक्षा करने के लिए, समाज का कल्याण करने के लिए। इस मौके पर किशोर गुप्ता, गोविंद जैन, राजीव जैन, रोहित अग्रवाल, दीपक गोयल, गोपाल टीबड़ेवाल, अमृत जैन, उमा देवी जैन, शिवजी शर्मा, राजेश खुलानिया सहित अन्य मौजूद थे। बच्चों के कंधे पर देश का भविष्य टिका है: उन्होंने बताया कि एक बार आशुतोष महाराज भ्रमण कर रहे थे तब उनकी नजर गरीब अनाथ बच्चों पर पड़ी जिनके कंधों पर कूड़े का बोझ था।


