सरकारी अस्पताल-स्वास्थ्य केंद्रों में 5 साल तक के बच्चों का बनेगा आधार

पूरे राज्य में 0 से 5 वर्ष के 30 प्रतिशत बच्चों का बना है आधार झारखंड में अब 0 से 5 वर्ष के बच्चों के लिए बाल आधार पंजीकरण आसान होगा। राज्य सरकार ने सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जिला अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में आधार पंजीकरण केंद्र खोलने का निर्णय लिया है। इन अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों में अलग कमरा होगा, जहां कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से बाल आधार बनाया जाएगा। इस काम के लिए केंद्र सरकार की एजेंसी सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड का चयन किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के प्रस्ताव को विभागीय मंत्री व विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली राज्य योजना प्राधिकृत समिति ने मंजूरी दे दी है। विभाग अब इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है। ऐसे काम करेगा सीएससी अस्पतालों-स्वास्थ्य केंद्रों में सिंगल विंडो सिस्टम से नामांकन होगा {हर केंद्र के लिए 200–250 वर्गफीट का अलग कमरा होगा {कमरे में बिजली, फर्नीचर व इंटरनेट होंगे {प्रशिक्षित ऑपरेटर, टैबलेट व बायोमेट्रिक डिवाइस रहेंगे {अभिभावकों से मोबाइल नंबर लिया जाएगा {नामांकन के बाद जमा राशि के विवरण वाली एनरोलमेंट स्लिप दी जाएगी। क्या है बाल आधार नामांकन बाल आधार योजना के तहत 5 वर्ष तक के बच्चों को जन्म प्रमाण पत्र और माता-पिता/अभिभावक के आधार नंबर के आधार पर आधार कार्ड दिया जाता है। इस उम्र में बायोमेट्रिक (उंगलियों के निशान या आईरिस) नहीं लिए जाते हैं। केवल फोटो व जरूरी विवरण दर्ज होते हैं। आधार नहीं होने से बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा था। डेटा निगरानी बच्चों का डेटा पूरी गोपनीयता के साथ रखा जाएगा {किसी एजेंसी, संगठन या व्यक्ति के साथ डेटा साझा नहीं होगा {उल्लंघन पर भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण द्वारा तय दंड और कार्रवाई होगी {नियम तोड़ने वाले ऑपरेटर या पर्यवेक्षक पर सख्त कार्रवाई की जाएगी भुगतान और संचालन व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा तय राशि का भुगतान स्वास्थ्य विभाग करेगा। राशि 9:1 के अनुपात में बंटेगी। { सीएससी-एसपीवी राज्य और केंद्र स्तर पर कर्मचारियों की नियुक्ति करेगा। फिलहाल राज्य में बाल आधार नामांकन के गिने-चुने केंद्र हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार 0-5 वर्ष के केवल 30% बच्चों का ही बाल आधार बना है। 38 लाख बच्चों में से सिर्फ 11.5 लाख का स्कूलों में नामांकन हो पाया है। इस वजह से बच्चों को केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

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