सरकारी गार्डन निजी कंपनी के नाम:घरों पर बोर्ड लगाकर लोगों का अनोखा विरोध-प्रदर्शन

रायपुर में काम करने वाली दूसरे राज्यों की बड़ी कंपनियों का ​दबदबा कितना है, ​इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अहमदाबाद की कंपनी को निगम का पूरा एक गार्डन दे दिया गया है। इसके विरोध में लोगों ने अपने घरों पर बोर्ड लगाकर अनोखा विरोध- प्रदर्शन कर रहे हैं। दरअसल, मरीन ड्राइव तेलीबांधा के पास स्थित मैथिलीशरण गुप्त गार्डन में जलविहार कॉलोनी, आनंद नगर, तेलीबांधा, शंकरनगर, कटोरा तालाब समेत आसपास के 10 हजार से ज्यादा लोग रोजाना आना-जाना करते थे। इतना ही नहीं, मरीन ड्राइव घूमने आने वाले लोग भी इस गार्डन में जाते थे। अब इस पूरे गार्डन को एमएस ईसीएचटी इंटीग्रेटेड फैसिलिटी प्राइवेट लिमिटेड अहमदाबाद को दे दिया गया है। कंपनी वाले इस गार्डन को मीना बाजार में तब्दील कर रहे हैं। गार्डन में लगे एक हजार से ज्यादा पेड़-पौधों को उखाड़ कर अभी वहां रोप कोर्स, जिप लाइन टू वे, जिप लाइन वन वे, जिप रोलर, जिप सायकल, ड्रॉप टावर, ड्रैगन कोस्टर, जोकर राइड, जंगल राइड, मिक्सर, पेंडूलम, ह्यूमन गायरो, 360 साइकल, टैंपो लाइन, फ्लाइंग कार, बाउंसी, फ्लाइंग कॉप्टर, मैरी गो राउंड, जिराफ, सन एण्ड मून जैसी एंटरटेनमेंट मशीनें लगाई जा रही है। अब इस गार्डन में आने वाले हर आदमी से कंपनी शुल्क वसूल करेगी। झूलों में झूलने के लिए भी महंगी टिकट ली जाएगी। मीना बाजार पूरी तरह से शुरू होने के बाद टिकट के दाम तय ​किए जाएंगे। लेकिन माना जा रहा है कि हर टिकट 100 से 500 रुपए तक की होगी। यानी जिस गार्डन में लोग बिना किसी शुल्क के आनंद लेते थे अब वहां जाने के लिए भी पैसे लगेंगे। कंपनी का निगम के साथ 12 साल का एग्रीमेंट है। अनुबंध हुए चार साल हो गए हैं। कंपनी ने पहले रेस्टोरेंट-होटल खोला और एंडवेंचर जोन बना रहे हैं। 1970 से है गार्डन कॉलोनीवालों ने संवारा
रायपुर विकास प्राधिकरण ने 1970 में जलविहार कॉलोनी में लोगों को प्लॉट बेचे थे। उस समय बताया गया था कि ये गार्डन की जमीन है। बाद में कॉलोनी वालों ने मिलकर इस गार्डन को बनाया। यह सार्वजनिक गार्डन था। हर कोई आ-जा सकता था। बाद में आरडीए ने कॉलोनी निगम को हैंडओवर कर दी। निगम वालों ने गार्डन का सौंदर्यीकरण भी कराया। गार्डन का नाम राष्ट्रीय कवि मैथिली शरण गुप्त के नाम पर रखा गया। अभी इस नाम का बोर्ड गार्डन के बाहर लगा है। पूरा इलाका कमर्शियल हो गया है
जलविहार कॉलोनी के सचिव सुदीप नियोगी के साथ ही वहां रहने वाले लोगों ने बताया कि ये पूरा इलाका ही कमर्शियल कर दिया गया है। इससे वहां लोगों का रहना ही मुश्किल हो रहा है। गार्डन की जमीन पर मीना बाजार खोला जा रहा है। वहां पहले से ही प्री फिट जिम, होटल-रेस्टोरेंट, मैड मूव जिम, पटेटो कैफे समेत कई तरह के कमर्शियल गतिविधियां संचालित है। देर रात तक लोगों का आना-जाना लगा रहता है। घरों के सामने गा​िड़यां खड़ी की जाती हैं। लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है। कुछ बोलो तो झगड़े पर उतारू हो जाते हैं। अक्सर नशे में लोग यहां हंगामा करते हैं। सरकारी गार्डन में व्यावसायिक उपयोग की अनुमति देना किसी भी तरह से नियम संगत नहीं है। हजारों लोगों को बेवजह परेशान किया जा रहा है। नगरीय प्रशासन मंत्री से भी शिकायत की है। लेकिन अभी तक काम नहीं रुका है। इससे श्री गहोई वैश्य समाज की भावनाओं को भी ठेस पहुंची है।
– सुखबीर सिंह सिंघोत्रा, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ सिख समाज घर-घर में विरोध की तख्तियां घरों के बाहर बोर्ड में लिखा- जलविहार कॉलोनी के गार्डन को स्प्री फूड लैब के अवैध कब्जे से मुक्त करो
राजधानी की जलविहार कॉलोनी में अनोखा विरोध-प्रदर्शन हो रहा है। यहां करीब 80 मकान के बाहर विरोध के रूप में एक समान बोर्ड लगाए गए हैं। जलविहार समेत आसपास के छह वार्डों से 10 हजार से ज्यादा लोग आते थे गार्डन, अब कंपनी बिना पैसे के प्रवेश नहीं देगी बोर्ड में लिखा है- जल विहार कॉलोनी के गार्डन को स्प्री फूड लैब के अवैध कब्जे से मुक्त करो। बता दें कि करीब 7 दिन से इसका विरोध कर रहे हैं। भास्कर एक्सपर्ट – फैसल रिजवी, वरिष्ठ अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट के नियम तोड़े
निगम वाले सार्वजनिक गार्डन में किसी भी निर्माण की अनुमति नहीं दे सकते हैं। जब तक राज्य सरकार अनुमति न दे। पार्कों और खेल मैदानों के लिए खुली जगहों का आरक्षण करना है न कि उसमें निर्माण। ताकि लोग खुले में सांस ले सकें। एक बार रिहायशी इलाके की घोषित जमीन का वाणिज्यिक उपयोग करना नियमों का उल्लंघन है। ऐसा हो ही नहीं सकता। देशभर में ऐसे कई मामले कोर्ट में जा चुके हैं ​जिसमें न्यायालय ने ऐसे निर्माण को अवैध माना और वहां से हटवाया है। मीना बाजार बनाने पेड़ भी काटे इस गार्डन को मीना बाजार में तब्दील कर रहे हैं। एक हजार से ज्यादा पेड़-पौधों को उखाड़ कर अभी वहां रोप कोर्स, जिप लाइन टू वे, जिप लाइन वन वे, जिप रोलर, जिप सायकल, ड्रॉप टावर, ड्रैगन कोस्टर, जोकर राइड आदि मशीनें लगाई जा रही है।​​​​​​​ सीधी बात – विश्वदीप, निगम कमिश्नर शुल्क निगम कंट्रोल करेगी
जलविहार कॉलोनी के गार्डन को खत्म कर दिया है। झूले लगा रहे हैं?
{कंपनी वहां चार साल से काम कर रही है। एग्रीमेंट की समीक्षा करेंगे।
जबरदस्ती रास्ते बंद किए गए हैं, प्रवेश के लिए पैसे मांग रहे हैं?
{कॉलोनी समेत सभी लोगों को क्या राहत दे सकते हैं, उसे देख रहे हैं।
झूले लगाकर महंगी टिकट ली जाएगी। आम लोग कैसे जाएंगे।
{नहीं ऐसा नहीं होगा, कोई भी शुल्क हो निगम उसे कंट्रोल करेगी। आरडीए ने जब जल विहार कॉलोनी बनाई थी, तब लोगों के लिए यह गार्डन बनाया था। बाद में आरडीए ने कॉलोनी और गार्डन निगम को हैंडओवर कर दिया। अब इसे प्राइवेट कंपनी को दे दिया है। दादागिरी इतनी है कि गार्डन जाने का रास्ता ही बंद कर दिया है। किराया 100 से 500 रुपए तक मांग रहे हैं।
-विवेक अग्रवाल, अध्यक्ष जल विहार कॉलोनी निगम के सरकारी गार्डन को निजी कंपनी को देने का फैसला कांग्रेस के कार्यकाल का है। कांग्रेसियों ने केवल इसी गार्डन को नहीं बल्कि कई जगहों पर सार्वजनिक उपयोग की चीजों को कंपनियों को दे दिया। इस एग्रीमेंट की समीक्षा की जाएगी। लोगों के लिए जो हो सकेगा मैं वो करूंगी।
– मीनल चौबे, महापौर, रायपुर नगर निगम

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