सरकारी जॉब के नाम पर धोखाधड़ी:इंदौर में गर्वमेंट अफसर बनकर 5 लाख की मांग, क्राइम ब्रांच ने शुरू की जांच

इंदौर के बंगाली कॉलोनी में एक व्यक्ति ने खुद को सरकारी अफसर बताकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र से लाखों की धोखाधड़ी की। इस मामले में क्राइम ब्रांच ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दीपचंद्र रायकवार, जो निवाड़ी के ढीकमपुरा का निवासी है, ने क्राइम ब्रांच में शिकायत की कि उसने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर अनिल रसेनिया से लाखों रुपए का भुगतान किया। दीपचंद्र ने बताया कि वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था और सरकारी वेबसाइट पर विभिन्न जॉब्स के लिए आवेदन किया था। मार्च 2024 में उसे एक कॉल आई, जिसमें अनिल ने खुद को सरकारी अफसर बताते हुए कहा कि वह उसे सरकारी या संविदा नौकरी दिलवा सकता है। इसके बाद दोनों की मुलाकात बंगाली कॉलोनी के डिफरेंस सोल्यूशन ऑफिस में हुई, जहां अनिल ने अपना सरकारी अफसर का आईडी कार्ड दिखाया और बताया कि जिला कोर्ट में ऑपरेटर की पोस्ट खाली है, जिसे वह सिलेक्ट करवा सकता है। इसके साथ ही, एक ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट से डिग्री भी जॉब के लिए बनवाने का वादा किया। अनिल ने इसके लिए 5 लाख रुपए की मांग की। दीपचंद्र ने पहले 10 हजार रुपए दिए और बाकी की रकम किश्तों में देने की बात की। इसके बाद, दीपचंद्र ने दो अकाउंट्स में करीब ढाई लाख रुपए ट्रांसफर किए। जब दीपचंद्र ने जॉइनिंग के बारे में पूछा, तो अनिल ने कहा कि कोर्ट में अभी समय लगेगा। इसके बाद अनिल ने दीपचंद्र से कहा कि वह उसे बाल विकास विभाग में परियोजना अधिकारी की जॉब दिलवा देगा। मई 2024 में उसने सागर संभाग का एक लेटर भेजा, जिसमें दीपचंद्र को परियोजना अधिकारी के पद पर नियुक्ति की बात की गई थी। लेकिन फिर अनिल ने इसे टाल दिया। दीपचंद्र ने जब अनिल के ऑफिस पर जाकर ताला लगा पाया, तो उसे पता चला कि अनिल ने पलासिया में ‘ब्राइटर फ्यूचर’ नाम से नया ऑफिस खोला है। जब दीपचंद्र वहां गया, तो उसे यह समझ में आया कि सारी बातें झूठी थीं। इसके बाद दीपचंद्र ने क्राइम ब्रांच में शिकायत की, और पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी है।

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