सरकारी स्कूल में खेलते-खेलते तीन छात्राएं वाटर टैंक (टांका) में गिर गईं। आसपास खेल रहे बच्चों ने टीचर को इसकी जानकारी दी। पानी में तीनों छात्राएं बुरी तरह से मलबे के नीचे दब गई थीं। आधे घंटे की मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला जा सका। इसके बाद उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। हादसा मंगलवार सुबह करीब 11 बजे बीकानेर के नोखा इलाके में हुआ। शिक्षा विभाग के अधिकारी भी पहुंचे
मंगलवार सुबह नोखा क्षेत्र के देवानाडा स्थित (केडली गांव) राजकीय प्राथमिक स्कूल में बच्चे खेल रहे थे। खेलते-खेलते प्रज्ञा (8) पुत्री रेखाराम जाट, भारती पुत्री ओमाराम जाट और रवीना पुत्री बागाराम स्कूल परिसर में ही बने वाटर टैंक के ऊपर चली गईं। अचानक से टैंक के ऊपर लगीं पटि्टयां टूट गईं और तीनों छात्राएं 20 फीट गहरे टैंक में गिर गईं। करीब 15 फीट तक इसमें पानी भरा था। अब देखिए, हादसे से जुड़ी 2 PHOTOS… टैंक का पानी निकालकर छात्राओं को निकाला
हादसे की सूचना पर आस-पास के ग्रामीण पहुंचे। ट्रैक्टर बुलाकर मोटर की मदद से टैंक का पानी बाहर निकाला गया। इसी दौरान सीढ़ी लगाकर चार ग्रामीण टैंक में उतरे। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद मलबे के नीचे दबी छात्राओं को बाहर निकाला गया। 23 साल पुराना टैंक, शिकायत के बाद भी मरम्मत नहीं कराया
प्रिंसिपल संतोष ने 18 दिसंबर 2024 को ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को जर्जर वाटर टैंक को लेकर लेटर भी लिखा है। उन्हें बताया गया था कि स्कूल में बना यह टैंक 5 इंच तक धंस गया है। कभी भी यह गिर सकता है। कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बाद भी टैंक की मरम्मत नहीं कराई गई। टैंक करीब 23 साल पुराना है। इसे ऊपर से पट्टी रखकर ढका गया था। घटना के समय टैंक में करीब 15 फीट पानी भरा था। हादसे की सूचना पर उपखंड अधिकारी गोपाल जांगिड़ और थानाधिकारी अमित स्वामी हॉस्पिटल पहुंचे। इधर, हादसे के बाद नोखा अस्पताल की मॉर्च्युरी के बाहर ग्रामीण धरने पर बैठ गए। वे लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित करने, पीड़ित परिवार को नियमानुसार मुआवजा देने की मांग पर अड़ गए। इस दौरान प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती और मुआवजे की मांग पूरी नहीं की जाती, तब तक शवों का पोस्टमॉर्टम नहीं कराया जाएगा। कलेक्टर नम्रता वृष्णी और एसपी कावेंद्र सिंह भी मौके पर पहुंचे।


