भास्कर न्यूज| लुधियाना बुड्ढा दरिया में बढ़ते प्रदूषण को लेकर काले पानी का मोर्चा ने बुधवार को सरकार और उद्योगपतियों पर सीधा हमला बोला। मोर्चा के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि सरकार और उद्योगपतियों की मिलीभगत से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेशों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। उन्होंने दावा किया कि डाइंग उद्योगों द्वारा संचालित तीनों कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट्स (सीईटीपी) के खिलाफ अदालत में अवमानना याचिकाएं दायर की गई हैं, क्योंकि एनजीटी के पुराने आदेशों की अब तक पालना नहीं हुई। मोर्चा के सदस्य जसकीरत सिंह ने कहा कि सरकार और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग एक-दूसरे को बचा रहे हैं। लखा सिंह सिधाना ने पंजाब सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विधानसभा में पवित्र शब्द पवन गुरु, पानी पिता का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने एक उद्योगपति को ही उद्योग मंत्री बना दिया है। यह हितों का सीधा टकराव और पर्यावरण के खिलाफ बड़ा कदम है। डॉ. अमनदीप सिंह बैस ने कहा कि बाबा सीचेवाल संगत से बुड्ढा दरिया की सफाई के लिए कार सेवा की अपील कर रहे हैं। जबकि यह दरअसल उद्योगों के मुनाफे के लिए किया गया प्रदूषण है। इसे कार सेवा कहना सिख परंपरा का अपमान है। कपिल अरोड़ा और कुलदीप सिंह खैरा ने बताया कि 22 जुलाई को बुड्ढा दरिया से जुड़े मामलों पर सुनवाई है, जो अहम साबित हो सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सीईटीपी संचालकों और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। मोर्चा ने लोगों से इस आंदोलन में जुड़ने की अपील की ताकि पर्यावरण संरक्षण की लड़ाई को ताकत मिल सके।


