2018 में जौड़ा फाटक ट्रेन हादसे के 2 पीड़ितों ने सरकारी नौकरी न मिलने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। जिस पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से 8 हफ्ते में जवाब मांगा है। पीड़ितों के वकील संदीप गोरसी ने बताया कि हादसे में 59 लोग मारे गए थे उस समय पंजाब सरकार ने 5 लाख और केंद्र सरकार ने 2 लाख के मुआवजे के साथ-साथ पीड़ित परिवारों के एक सदस्य को नौकरी देने का भी ऐलान किया था। हादसे में जान गंवाने वाले 59 लोगों के आश्रितों में से 34 को सरकारी नौकरी मिल गई, जबकि 25 आज भी नौकरी के इंतजार में हैं। नौकरी न मिलने पर 2 पीड़ितों निशा और बिरेश ने हाईकोर्ट में इंसाफ की गुहार लगाई है। दोनों के पिता दिनेश कुमार प्रसाद और चंद्रिका यादव की हादसे में मौत हुई थी। निशा और बिरेश अब ग्रेजुएट हो चुके हैं और बिहार के मूल निवासी हैं। पीड़ितों ने बीते 16 अप्रैल 2021 को प्रशासन को रिप्रजेंटेंशन दिया था कि उन्हें सरकारी नौकरी का लाभ नहीं मिल सका है जिसके बाद तत्कालीन डीसी ने एसडीएम को वेरिफाई करने के लिए लिखा था। वहीं जब एसडीएम ने पटवारी से रिपोर्ट मंगवाई तो पीड़ितों के हक में रही कि दोनों ही सरकारी जॉब के लिए डिजर्व करते हैं। जिसके बाद डीसी ने यह रिपोर्ट सेक्रेटरी पंजाब सरकार को भेजा था मगर 4 साल बीतने के बाद भी सरकार ने नौकरी नहीं दी। थक-हारकर इंसाफ के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। बता दें कि 2018 में हादसे के दौरान निशा 16 तो बिरेश 17 साल का होने के कारण नाबालिग थे। हालांकि अब दोनों ही बालिग हो चुके हैं। इन्होंने अपनी पढ़ाई कंटीन्यू रखी और साल 2021 में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल कर चुके हैं। पिता का साया सर से उठने के बाद बिहार जाकर शिफ्ट हो गए हैं। आर्थिक तौर पर कमजोर होने के कारण इनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही थी।


