सरगुजा में दवा दुकान से नशीले इंजेक्शन एवं टैबलेट बेचने के मामले में विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट अतुल कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने मेडिकल स्टोर के संचालक को 15 वर्ष के कारावास एवं डेढ़ लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। मेडिकल स्टोर संचालक की पत्नी को अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। एक वर्ष पूर्व मेडिकल स्टोर संचालक को नशीली दवाएं बेचते हुए पकड़ा गया था। जानकारी के मुताबिक, जनपद पारा रोड में संचालित दर्श मेडिकल स्टोर में 23 फरवरी 2024 को पुलिस ने छापा मारा था। दवा दुकान से युवकों को बिना डॉक्टर की पर्ची उंचे दरों पर नशीले इंजेक्शन एवं नशीले टैबलेट बेचने की सूचना मिली थी। सीएसपी अखिलेश कौशिक के साथ औषधि निरीक्षकों की टीम ने दुकान में छापा मरा। मेडिकल स्टोर के काउंटर से 6 लिफाफों में अल्प्राजोलम टेबलेट (RLM 0.5 MG) और बूप्रेनोरफीन इंजेक्शन बरामद हुए। स्टोर रूम से अतिरिक्त 130 बूप्रेनोरफीन इंजेक्शन (कुल 260 ML), 155 फेनिरामाइन इंजेक्शन और 318 अल्प्राजोलम टेबलेट (193.9 ग्राम) जब्त किए गए। सभी की वैधता एक्सपायरी तक थी, लेकिन बिना वैध अनुमति के रखे और बेचे जा रहे थे। औषधि प्रशासन की रिपोर्ट में भी अनियमितताएं पाई गईं। कार्रवाई के दौरान देवेश जायसवाल फरार हो गया था, जिसने बाद में आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने देवेश जायसवाल एवं उसकी पत्नी ज्योति जायसवाल के खिलाफ एनडीपीएस की धारा 22 के तहत अपराध दर्ज किया था अदालत ने सुनाई कड़ी सजा
एनडीपीएस एक्ट के पीठासीन अधिकारी अतुल कुमार श्रीवास्तव ने अभियोजन के साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए देवेश जायसवाल को धारा-22(सी) के तहत दोषी ठहराया। उसकी पत्नी ज्योति को साक्ष्य अपर्याप्त मानकर अदालत ने बरी कर दिया। अदालत ने नशीली दवाओं की जब्त मात्रा, मेडिकल स्टोर संचालक होने के नाते अनुज्ञप्ति दुरुपयोग को गंभीर अपराध मानते हुए संचालक को 15 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही डेढ़ लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर 1 वर्ष अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।


