वनवासी कल्याण केंद्र झारखंड द्वारा बुधवार को आरोग्य भवन में सरहुल मिलन समारोह आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री भगवान सहाय ने कहा कि अखिल वनवासी कल्याण आश्रम पिछले 70 वर्षों से जनजातीय समाज के बीच कार्य कर रहा है। देश के 16625 जनजातीय स्थानों पर 21829 सेवा प्रकल्प संचालित कर रहा है। विशिष्ट अतिथि विकास भारती के पद्मश्री अशोक भगत ने सरहुल की महत्ता पर कहा कि प्रकृति से जुड़ा महापर्व सरहुल नाच-गान और उत्सव मनाने के साथ प्रकृति को संरक्षण देने का भी संदेश देता है। आधुनिकता की दौड़ में जिस तरह से प्रकृति का शोषण और दोहन किया जा रहा है, यह समाज के हर वर्ग के लिए चिंतनीय है। क्षेत्रीय संगठन मंत्री प्रफुल्ल अकांत ने बताया कि सरहुल पर्व रिश्तों को निभाने का संदेश देता है, रिश्तों को निभाना ही संस्कृति है। धरती से रिश्ता निभाना, पर्यावरण, प्रकृति से रिश्ता निभाना यह सब संस्कृति का ही हिस्सा है। पाहनों को अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। स्वागत भाषण प्रांतीय अध्यक्ष सुदान मुंडा ने और मंच संचालन डॉ तनुजा मुंडा ने किया। उरांव, मुंडारी व नागपुरी नृत्य टोलियों ने पारंपरिक नृत्य कला का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर रीझु कच्छप, सुशील मरांडी, मेघा उरांव, रोशनी खलखो, संदीप उरांव, पूनम पूर्ति, जिज्ञासा ओझा, पवन मंत्री, पूनम गुप्ता, सोमा उरांव, सुनील कुमार सिंह, विजय चौधरी, किरण बांडों आदि लोग मौजूद रहे।


