रांची| महापर्व सरहुल महोत्सव की शुरुआत सोमवार को सरना स्थलों में पूजा-अर्चना के साथ हुई। सभी मौजा के युवाओं ने केकड़ा-मछली पकड़ा। शाम में जल रखाई पूजा की गई। मंगलवार को सभी सरना स्थलों में पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी और दोपहर एक बजे से सरहुल शोभायात्रा निकलेगी। मुख्य पाहन जगलाल पाहन ने बताया कि सोमवार रात 8 बजे मांदर, ढोल और नगाड़ा की थाप पर ग्रामीणों के साथ जल रखाई की पूजा की गई। मंगलवार की सुबह पाहन सरना स्थल में रखे घड़े के पानी का स्तर देख कर मौसम की भविष्यवाणी करेंगे। इस साल की बारिश के बारे में बताएंगे। इसके बाद सुबह 10 बजे पुन: प्रत्येक सरना स्थल में पूजा की जाएगी। जगलाल पाहन ने बताया कि इस वर्ष केकड़ा बहुत ही मुश्किल से मिला। अगर केकड़ा नहीं मिलता तो केकड़ा पकड़ाई रस्म के बिना ही सरहूल पूजा की शुरुआत की जाती। अंत में एदलहातू से केकड़ा पकड़ कर लाया गया। केकड़ा नहीं मिलने के बारे में बताया कि अब खेतों में केमिकल युक्त खाद का उपयोग किया जा रहा है इस कारण केकड़ा, मछली या सांप सभी खत्म होते जा रहे हैं।


