सरेंडर नक्सलियों को बना रहे ट्रैक्टर मैकेनिक ड्राइवर व प्लंबर, ब्लॉकों में भी शुरू करेंगे सेंटर

आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ​उन्हें स्किल्ड बना रही है। नारायणपुर और बीजापुर में सरेंडर नक्सलियों को प्रशिक्षित करने के लिए तीन बैच भी चालू किए गए हैं। इसमें उन्हें प्लंबर, ड्राइवर, क्रेन आपरेटर बनने की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसके अलावा नियद नेल्लानार योजना के तहत कैंप से लगे गांवों के साढ़े तीन हजार से ज्यादा युवाओं का सर्वे किया गया है जिन्हें कौशल विकास प्रशिक्षण के माध्यम से ट्रेंड किया जाएगा। राज्य शासन की कौशल विकास योजना के तहत दंतेवाड़ा, बीजापुर, कांकेर समेत सात जिलों के युवाओं को टैक्टर मै​केनिक से लेकर योगा इंस्ट्रक्टर तक अलग-अलग सौ से ज्यादा प्रकार की विधा में ट्रेंड किया जा रहा है। ट्रेनिंग देने के साथ ही उनका स्थानीय कंपनियों, दुकानों तथा फै​क्ट्रियों में प्लेसमेंट भी किया जा रहा है। इस साल लगभग 4915 युवाओं को प्रशिक्षित करने का टारगेट रखा गया है। वहीं स्किल डवलपमेंट को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार अब ब्लॉक स्तर पर भी प्रशिक्षण सेंटर खोलने जा रही है। इसी तरह दूर दराज के युवाओं को ट्रेनिंग देने के लिए रेसीडेंसियल ट्रेनिंग सेंटर खोलने की तैयारी में है ताकि वहीं रहकर वे ट्रेंड हो सकें। दरअसल नक्सल प्रभावित इलाकों में नियद नेल्लानार जैसी योजनाओं के माध्यम से राज्य शासन एक ओर जहां अलग-अलग विभागों की योजनाओं को गांव के लोगों तक पहुंचा रही है वहीं दूसरी ओर वहां के युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है। सोलर पैनल के साथ ही जल वितरण संचालक की ट्रेनिंग भी दे रहे स्किल डवलपमेंट के तहत युवाओं को सोलर पैनल, जल वितरण संचालक, सिक्योरिटी गार्ड, असिस्टेंट इले​िक्ट्रशियन, आयुर्वेद डायटिशियन, ट्रैक्टर मैकेनिक, टेलर, मशरुम ग्रोवर, हाउसकीपर कम कुक, डाटा एंट्री आपरेटर, पोल्ट्री फार्मर, डेयरी, दोपहिया आैर तीनपहिया टेक्नीशियन, वेल्डर, योगा इंस्ट्रक्टर, ट्रेवल कंस्लटेंट, बैम्बू हैंडीक्राफ्ट, टैक्सी ड्राइवर, इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन जैसी सौ से ज्यादा विषयों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। स्थानीय फै​क्ट्रियों, दुकानों व कंपनियों में दिलवा रहे हैं युवाओं को रोजगार 4915 लोगों को ​इस साल प्रशिक्षित करने का टारगेट रखा गया है। इनमें बस्तर के 820, बीजापुर के 510, दंतेवाड़ा के 930, कांकेर के 680, कोंडागांव के 965, नारायणपुर के 510 आैर सुकमा जिले के 500 लोगों को प्रशिक्षण देने का टारगेट रखा गया है। अभी तक 669 लोगों को प्रशिक्षित किया गया है जिनमें से 296 लोगों का स्थानीय फैक्ट्री व दुकानों में प्लेसमेंट किया गया है। जबकि पिछले साल 1512 लोगों में से 965 लोगों को रोजगार दिलाया गया है।

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