भास्कर न्यूज| टिटिलागढ़ एक तरफ सरकार मुफ्त इलाज और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर टिटिलागढ़ से आई एक झकझोर देने वाली खबर ने पूरे तंत्र की पोल खोल दी है। सर्जरी के दौरान हुई डॉक्टर की चूक और फिर इलाज के लिए पैसों की कमी के कारण एक 26 साल की महिला सेवती सिपका ने करीब पांच महीने तक जिंदगी और मौत के बीच जूझते हुए दम तोड़ दिया। घटना की शुरुआत पिछले साल 16 अगस्त को हुई, जब देसिल गांव की सेवती को प्रसव पीड़ा के कारण टिटिलागढ़ के मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। सर्जरी के दौरान एक बच्ची ने जन्म तो लिया, लेकिन डॉक्टरों की कथित लापरवाही से महिला की खाने की नली कट गई। हालत बिगड़ने पर उसे आनंद-फानन में बलांगीर के भीम भोई मेडिकल कॉलेज और फिर बुर्ला मेडिकल ले जाया गया। मरीज के परिजनों ने बताया कि सरकारी मदद के अभाव में उन्हें एम्बुलेंस तक के लिए भटकना पड़ा। अंततः उन्होंने निजी कार किराए पर ली और भुवनेश्वर के कोणार्क हॉस्पिटल में भर्ती कराया। हेल्थ इंश्योरेंस कार्ड से 2 लाख रुपये खर्च होने के बाद अस्पताल ने और पैसे की मांग की। इलाज जारी रखने के लिए परिवार ने अपना घर गिरवी रख दिया और कर्ज लेकर करीब 9 लाख रुपये खर्च किए। तीन महीने तक निजी अस्पताल में रखने के बाद जब परिवार और पैसे देने में असमर्थ हो गया, तो अस्पताल ने उन्हें वापस भेज दिया।


