सर्द हवाओं के कारण ठिठुरन बढ़ गई हैं, आलम यह हैं, कि सुबह 10 बजे तक कंपकंपी रहती है। दोपहर के समय हल्की धूप से थोड़ी राहत जरूर लोगों को मिलती है। बता दें कि जम्मू, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड व लद्दाख में बर्फबारी हो रही हैं, जिसके कारण ही सर्द हवाओं आ रही है। आने वाले दिनों में बर्फ पिघलेगी, जिससे हवा की रफ्तार तेज होगी और ठंड का असर बढ़ जाएगा। इसी कारण जनवरी का महीना ठंड रहता हैं, अब आगामी 20 से 22 दिनों तक शीतलहर चलने का अनुमान है। धार सहित ग्रामीण अंचल में ठंडी हवाओं व कोहरे के साथ नए साल का स्वागत किया गया। रात के साथ दिन का तापमान भी घट रहा हैं, जहां न्यूनतम तापमान 12 डिग्री व अधिकतम तापमान 23 डिग्री के नीचे तक पहुंच गया है। मौसम वैज्ञानिक प्रदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि पश्चिमी-उत्तरी भारत में वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव है। एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन भी गुजर रहा हैं, इस वजह से दो दिन ओले गिरने के साथ बारिष हुई थी। अब बर्फबारी के कारण ठंड बढे़गी। फसलों को फायदा
दरअसल इस साल दिसंबर की सर्दी ने टेंड बदल दिया हैं, पिछले 10 सालों का रिकाॅर्ड और ट्रेंड देखें तो दिसंबर के दूसरे पखवाड़े में कड़ाके की ठंड पडती रही हैं, लेकिन इस बार पहले ही पखवाड़े में तेज सर्दी का असर है। बता दें कि नवंबर में भी सर्दी अपना रिकाॅर्ड तोड़ चुकी है। दिसंबर माह के शुरुआत दिनों से ही ठंड का असर बढ़ने लगा हैं, इस साल की सबसे ठड़ी रात 10 दिसंबर की रही हैं, तब न्यूनतम तापमान 7.8 डिग्री पहुंच चुका था। रबी के सीजन की पहली मावठे की बारिश फसलों के लिए फायदेमंद भी रहेगी। किसान आशीष यादव के अनुसार गेंहू, चना और मक्का की फसलों के लिए न वरदान साबित हुई हैं, लेकिन वहीं मटर, लहसून, प्याज और धनिये की फसलों को बारिश से नुकसान होने की आशंका है। क्योंकि मटर पककर टूटने के लिए तैयार हैं। किसानों के अनुसार गेंहू को मिली बारिश शत-प्रतिशत फायदा देगी। अब ठंड का दौर बढना चाहिए, बारिश के बाद ठंड बढ़ने से फसलों की ग्रोथ अच्छी रहती है। एक नजर में तापमान


