झारखंड की स्टार महिला हॉकी खिलाड़ी और भारतीय हॉकी टीम की कप्तान सलीमा टेटे को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया। इसके साथ ही सलीमा टेटे झारखंड की पहली महिला और दूसरी हॉकी खिलाड़ी बन गईं, जिन्हें अर्जुन अवॉर्ड दिया गया। इससे पहले 1972 में ओलंपियन स्व. माइकल किंडो को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। जबकि, सिलवानुस डुंगडुंग और सुमराय टेटे को मेजर ध्यानचंद अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। बचपन अभाव में बीता सिमडेगा के सदर प्रखंड के गांव बड़की छापर में पली-बढ़ी सलीमा का बचपन अभाव में बीता। बांस से बनी स्टिक से हॉकी की शुरुआत हुई। 2011 में सलीमा ने बेस्ट खिलाड़ी का पुरस्कार जीता था पिता सुलक्षण टेटे और मां सुभानी टेटे किसान हैं। सलीमा के पिता भी हॉकी खिलाड़ी रह चुके हैं। इसका फायदा उन्हें मिला और पिता के रूप में ही आरंभिक कोच मिल गया था। वे सलीमा को जिले में होनेवाली लठ्ठाखम्हन प्रतियोगिता में खेलने के लिए पहली बार 2011 में ले गए थे। सलीमा ने बेस्ट खिलाड़ी का पुरस्कार जीता। इसी दौरान गांव में हॉकी को प्रमोट करनेवाले तत्कालीन हॉकी सिमडेगा के संयुक्त सचिव मनोज कोनबेगी की नजर सलीमा पर गई। इसके बाद फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2016 में पहली बार जूनियर भारतीय महिला हॉकी टीम में चुनी गईं
एक-दो साल तक सलीमा का चयन सिमडेगा के हॉकी आवसीय सेंटर में नहीं हो पाया। पर, वह निराश नहीं हुई। उसी कैंपस में दूसरे हॉस्टल में रहने लगी। घर से लकड़ी लाकर खुद खाना बनाती थी। फिर, आवासीय सेंटर के खिलाड़ियों के साथ प्रैक्टिस करती थी। उनकी प्रतिभा व मेहनत को देखते हुए उनको 2013 में आवासीय सेंटर में शामिल किया गया। दो माह के अंदर ही सलीमा ने एसजीएफआई की राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए झारखंड टीम में जगह बना ली। 2014 में भी सब जूनियर झारखंड टीम में चुनी गईं। 2016 में पहली बार जूनियर भारतीय महिला हॉकी टीम में चुनी गई और स्पेन दौरे पर गईं। 2016 में ही बैंकॉक में आयोजित अंडर-18 एशिया कप के लिए जूनियर भारतीय महिला टीम की उपकप्तान बनाई गईं। टीम ने कांस्य पदक जीता। 2016 नवंबर सलीमा का चयन सीनियर टीम में हुआ और वह आस्ट्रेलिया दौरे पर गईं। सलीमा को 2018 में हुए यूथ ओलंपिक से बड़ी पहचान मिली। उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने इस प्रतियोगिता में रजत पदक जीता था। 2024 भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान बनाईं गईं।


