राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सलूंबर नगर में एक विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन नगर के बस्ती क्रमांक-4 स्थित जागेश्वर महादेव मंदिर के परिसर में संपन्न हुआ। इस आयोजन में करगेटा, प्रताप चौराहा, उपाध्याय कॉलोनी, विनायक नगर, सरस्वती कॉलोनी, पुलिस थाना क्षेत्र और सनसिटी सूरों का कुआं सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में सनातनी हिंदुओं ने संगठित होकर सहभागिता निभाई। आयोजन समिति के अध्यक्ष लीलाधर त्रिवेदी ने बताया कि सम्मेलन को त्रिवेणी धाम बनोडा के रामानुजाचार्य महाराज, श्री पंचधाम जेताना के महात्मा प्रकाशानंद और सेवाधारी महाराज का सानिध्य प्राप्त हुआ। सम्मेलन के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक धनराज भाई साहब थे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने भारत को तोड़ने के कई प्रयास किए, लेकिन सनातन संस्कृति की जड़ें आज भी मजबूत और जीवंत हैं। धनराज भाई साहब ने समाज से जाति-पात से ऊपर उठकर संगठित होने और राष्ट्र निर्माण व विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि हमारी धर्म और संस्कृति प्राचीन, गौरवशाली है और विश्व को दिशा देने वाली रही है। इसे कमजोर करने के प्रयासों का संगठित होकर विरोध करना प्रत्येक सनातनी का दायित्व है। इस मौके पर श्री पंचधाम जेताना के महात्मा प्रकाशानंद ने स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को प्रकृति पूजन के समान बताया। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा पर बल दिया। मौन व्रतधारी महात्मा रामानुजाचार्य ने अपने लिखित वक्तव्य के माध्यम से धर्म रक्षा के विषय पर समाज को जागृत करने का संदेश दिया। सम्मेलन में मातृशक्ति नीलू पुरबिया ने कुटुंब प्रबोधन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपने विचार रखे। आयोजन समिति के पूर्णेश शर्मा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन नरेश कुमार चाष्टा ने किया। सम्मेलन का समापन राष्ट्र, धर्म और समाज की एकता एवं उत्थान के संकल्प के साथ हुआ।


