सहायक आचार्य नियुक्ति : अभ्यर्थी बोले- शपथ पत्र के आधार पर डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन का मौका दे

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) द्वारा आयोजित सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में शॉर्टलिस्टेड सैकड़ों अभ्यर्थियों का बायोमे​ट्रिक्स नहीं मिलने के कारण डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन से वंचित रहने का मामला प्रकाश में आया है। इससे शॉर्टलिस्टेड अभ्यर्थियों में आक्रोश और नाराजगी है। इनका कहना है कि बायोमेट्रिक मिसमैच के चलते उनका भविष्य अधर में लटक गया है। डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन से वंचित अभ्यर्थियों ने शपथ पत्र लेकर डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन कराने का आग्रह किया है। अभ्यर्थियों ने कहा कि तीन पेपर में से किसी एक में भी बायोमेट्रिक मिसमैच होने पर डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन से रोक दिया गया है। अभ्यर्थियों ने बताया कि शॉर्टलिस्टेड कैंडिडेट्स को मौखिक रुप से आश्वासन दिया गया है कि आपलोगों का डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन बाद में कराया जाएगा। अभ्यर्थियों ने कहा कि लंबे समय के बाद वैकेंसी आई थी, जिसमें शॉर्टलिस्टेड हुए थे। लेकिन सिर्फ बायोमैट्रिक्स का मिलान नहीं होने के चलते उन्हें डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन से वंचित होना पड़ा है। अभ्यर्थियों ने दिया आवेदन सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में जिन अभ्यर्थियों का बायोमैट्रिक्स मिसमैच हुआ है, उन्होंने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को आवेदन देकर डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन कराने की मांग की है। आवेदन में लिखा है कि कक्षा एक से पांच के लिए सेलेक्शन हुआ है। लेकिन तीन पेपर में से एक में बायोमैट्रिक्स मिसमैच होने के चलते डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन से वंचित होना पड़ा है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक से मिलकर टेट सफल सहायक अध्यापक संघ ने अभ्यर्थियों का पक्ष रखा है। निदेशक से कहा कि जिन अभ्यर्थियों का बायोमैट्रिक्स मिसमैच हुआ है, उनका शपथ पत्र के आधार पर जल्द से जल्द डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन कराया जाए। मिसमैच कैसे हुआ, यह समझ से परे है। निदेशक ने संघ को आश्वासन दिया है कि बायोमेट्रिक ने अभी तक किसी भी अभ्यर्थी का आवेदन रिजेक्ट नहीं किया है। जल्द ही इस मामले पर कोई निर्णय लिया जाएगा। संघ की मांगों से संबंधित कॉपी जेएसएससी को भेजा जाएगा। संघ के प्रदेश संरक्षक प्रमोद कुमार ने कहा कि जब तक बायोमेट्रिक की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक शपथ पत्र के आधार पर डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन कराने की मांग की है । सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन कराने पहुंचे अभ्यर्थियों को तीन बार बायोमैट्रिक करना पड़ता था। क्योंकि तीन पेपर का एग्जाम हुआ था। एक अभ्यर्थी का तीन तरह का बॉयोमैट्रिक्स सामने आया है। इसका मतलब है कि परीक्षा के समय अभ्यर्थी की जगह डमी तो एग्जाम दे रहा था। यह जांच से से ही पता चलेगा।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *