सांसद की आपत्ति से अटकेगा ₹500 करोड़ का प्रोजेक्ट:आखिरी दौर में पहुंच चुकी भोपाल कलेक्टोरेट शिफ्टिंग; प्लान भी बन चुके

भोपाल के कलेक्टोरेट और कमिश्नर ऑफिस को प्रोफेसर कॉलोनी में शिफ्ट करने के प्रोजेक्ट पर सांसद आलोक शर्मा की ऐसे समय पर आपत्ति आई है, जब सभी प्लान बन चुके हैं। ऐसे में करीब 500 करोड़ रुपए लागत का यह प्रोजेक्ट अब अटक सकता है। अफसरों ने भी शिफ्टिंग की प्रक्रिया फिलहाल रोक दी है। सांसद इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी मिलने की बात कह चुके हैं। बता दें कि, प्रोफेसर कॉलोनी में 6 मंजिला बिल्डिंग बनेगी। जहां पर कलेक्टर और कमिश्नर ऑफिस शिफ्ट होंगे। करीब तीन महीने पहले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने प्रोफेसर कॉलोनी और कलेक्टोरेट कैंपस रीडेंसीफिकेशन प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी थी। इसके बाद सरकारी दफ्तर कहां लगेंगे? इसे लेकर भी प्लान भी बन चुके हैं, लेकिन शिफ्टिंग से पहले ही सांसद शर्मा का इस मामले में बयान आ गया। सांसद शर्मा ने रविवार को यह कहा था- पुराने भोपाल से सारे सरकारी ऑफिस जा रहे हैं। नगर निगम और आरटीओ पहले ही जा चुके हैं। पुराने भोपाल की जनता मेरे पास आ रही है। उनका कहना है कि अब कलेक्टर ऑफिस नहीं जाना चाहिए। इस बारे में कलेक्टर से चर्चा की है। इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी मिलूंगा। आपत्ति से अफसरों ने भी प्रक्रिया रोकी
सांसद की आपत्ति के बाद जिला प्रशासन ने भी इस प्रोजेक्ट की प्रक्रिया रोक दी है। अफसरों का कहना है कि मामले में सभी प्रक्रिया हो चुकी है। सोमवार को इस मुद्दे पर वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बातचीत भी हुई। ढाई साल पहले बना था प्रोजेक्ट बता दें कि करीब दो साल पहले हाउसिंग बोर्ड ने यह प्रोजेक्ट बनाया था, लेकिन भोपाल सिटीजंस फोरम ने इलाके में पेड़ काटने और छोटे तालाब से 50 मीटर के दायरे में निर्माण को लेकर एनजीटी में याचिका दायर की थी। इसी मामले में हरी झंडी मिली। सुनवाई के दौरान हाउसिंग बोर्ड ने बताया था कि प्लानिंग इस तरह से की गई है कि ज्यादातर पेड़ बचाए गए हैं। यह तालाब से 60 से 150 मीटर दूर बनेगा। यह प्रोजेक्ट प्रोफेसर कॉलोनी में लगभग 13 एकड़ में प्रस्तावित है। हाउसिंग बोर्ड ने दिया था प्रेजेंटेशन
हाउसिंग बोर्ड के अफसरों ने संशोधित प्रोजेक्ट का पावर पाइंट प्रेजेंटेशन कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को भी दिखाया था। प्रोजेक्ट करीब 500 करोड़ रुपए का है। इसके जल्द टेंडर प्रोसेस करने की बात भी अफसरों ने कही। इसके बाद वहां के मकान और सरकारी दफ्तरों को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू होगी। कलेक्टर पूछ चुके- कहां, कब और कैसे शिफ्टिंग?
करीब ढाई महीने पहले कलेक्टर सिंह ने प्रोफेसर कॉलोनी में लगने वाले जल संसाधन, संपदा संचालनालय, एनसीसी, श्रम विभाग और अन्य दफ्तरों के अफसरों से पूछा था कि वे अपने दफ्तर कहां शिफ्ट करेंगे? जिस पर उन्होंने वैकल्पिक व्यवस्था करने की बात कही। जानकारी के अनुसार, प्रशासनिक अफसरों का दो बिंदुओं पर फोकस है। जिसमें पहला बिंदू सरकारी ऑफिस और आवास को शिफ्ट करना है। यहां सरकारी ऑफिस के साथ ही क्वार्टर बी-1, 2, 3 और 4 तक के आवास भी हटाए जाएंगे। इसके बाद रिव्यू बैठकें भी हो चुकी हैं। इसी बीच सांसद शर्मा के ताजा बयान से मामला सुर्खियों में आ गया है। 5 से 6 फ्लोर का भवन
जानकारी के अनुसार, जो प्लान है, उसमें नया कलेक्टोरेट भवन 5 से 6 फ्लोर का होगा। हर फ्लोर पर 6 से 7 हजार स्क्वेयर फीट एरिया रहेगा। कौन सा सरकारी ऑफिस कहां पर रहेगा, इस पर भी मंथन किया जा रहा है। बता दें कि यहां कमिश्नरी ऑफिस के अलावा हुजूर और बैरागढ़ एसडीएम, तहसील दफ्तर, पुराना सचिवालय के अन्य दफ्तर भी बनाए जाएंगे। कलेक्टोरेट के लिए 9 बार तलाशी जगह
साल 1972 से अब तक कलेक्टोरेट के लिए 9 बार अलग-अलग जगहों पर विचार हुआ, लेकिन हर बार कोई न कोई अड़चन आ गई। अब एनजीटी के फैसले के बाद 2024 में इस नई साइट को मंजूरी मिली है। हालांकि, सांसद की आपत्ति के बाद एक बार फिर से यह प्रोजेक्ट अटक सकता है।

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