साइबर फ्रॉड के लिए अकाउंट खोलने वाले 6 आरोपी गिरफ्तार:लोगों को मिलते थे 5 हजार रुपए महीने का किराया; बैंक से थी सांठगांठ

ग्वालियर में क्राइम ब्रांच ने साइबर फ्रॉड में उपयोग होने वाले “म्यूल” बैंक अकाउंट रैकेट का खुलासा किया है। नया बाजार स्थित महाकाल एमपी ऑनलाइन शॉप के संचालक इस रैकेट का मुख्य सूत्रधार थे। आरोपी बैंक से सांठगांठ कर “म्यूल” अकाउंट खोलता था और हर अकाउंट के बदले उसे 1,000 रुपए कमीशन मिलता था। देश में साइबर फ्रॉड की राशि को अलग-अलग खाते में ट्रांसफर करने के लिए ऐसे “म्यूल” अकाउंट की आवश्यकता होती है। क्राइम ब्रांच ने एमपी ऑनलाइन के संचालक समेत 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जिन लोगों के दस्तावेज पर “म्यूल” अकाउंट खोले जाते थे, उन्हें 5,000 रुपए महीना किराया मिलता था। क्राइम ब्रांच ने यह कार्रवाई मंगलवार को दिनभर की जांच के बाद की। मामले का खुलासा बुधवार को किया गया। ग्वालियर एसएसपी धर्मवीर सिंह को सूचना मिली थी कि देश में डिजिटल फ्रॉड और अन्य साइबर अपराध में ठगे गए रुपए निकालने के लिए “म्यूल” बैंक अकाउंट का उपयोग किया जाता है। इनमें अधिकतर खाते ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के थे। एसएसपी धर्मवीर सिंह ने क्राइम ब्रांच निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह कुशवाह को इस मामले की जांच के लिए लगाया। जांच के दौरान यह पता चला कि नया बाजार में महाकाल एमपी ऑनलाइन शॉप के संचालक नरेन्द्र सिंह सिकरवार इस रैकेट में शामिल थे। पूछताछ में पता चला कि अकाउंट खोलने के लिए अजय परिहार और बृजेश रजक कस्टमर लेकर आते थे। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनकी पहचान इस तरह हुई। तलाशी में मिले 80 बैंक के एटीएम कार्ड महाकाल एमपी ऑनलाइन शॉप की तलाशी के दौरान 80 अलग-अलग बैंक के एटीएम कार्ड मिले। इनमें 74 फिनो बैंक, और एक-एक एसबीआई, यूनियन बैंक, कोटक बैंक, एनएसडीएल, पंजाब एंड सिंध बैंक के कार्ड शामिल थे। इन खातों की जांच टोल-फ्री नंबर 1930 साइबर क्राइम पोर्टल पर भी की गई, जिसमें अधिकांश खातों को साइबर फ्रॉड में उपयोग के लिए रिपोर्टेड पाया गया। कमाई का तरीका पूछताछ में पता चला कि “म्यूल” अकाउंट खोलने पर एमपी ऑनलाइन शॉप संचालक नरेन्द्र सिंह सिकरवार को 1,000 रुपए प्रति खाता मिलते थे। वहीं, अकाउंट खुलवाने वाले अजय और बृजेश अकाउंट धारक को 5,000 रुपए महीना किराया देते थे। “म्यूल” बैंक अकाउंट क्या हैं? साइबर फ्रॉड के दौरान ठग अलग-अलग बैंक अकाउंट में राशि ट्रांसफर कर निकालते हैं। ऐसे खाते गरीब या जरूरतमंद लोगों के दस्तावेज़ पर खोले जाते हैं। अकाउंट उनके नाम पर होता है, लेकिन एटीएम कार्ड, चेक बुक और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर ठगों के पास रहते हैं। इसके बदले अकाउंट होल्डर को 5-6 हजार रुपए महीना किराया मिलता है। तीन महीने से चल रहा था रैकेट जांच में पता चला कि महाकाल एमपी ऑनलाइन शॉप पर पिछले तीन महीने से यह रैकेट चल रहा था। पुलिस ने रजिस्टर, डाटा एंट्री चेक रजिस्टर, कंप्यूटर और लैपटॉप जब्त कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। एसएसपी ग्वालियर धर्मवीर सिंह ने बताया कि “म्यूल” बैंक अकाउंट रैकेट का खुलासा क्राइम ब्रांच ने किया है। 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और जांच अभी जारी है। आगे और आरोपियों की पहचान हो सकती है।

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