धार जिले के साढ़े तीन साल के मासूम बच्चे महिम्न मंडलोई ने शतरंज की दुनिया में ऐसा कमाल कर दिखाया है, जिससे पूरा जिला गौरवान्वित है। इंदौर में रविवार को आयोजित दो अखिल भारतीय शतरंज चैंपियनशिप में देशभर से आए 200 से अधिक खिलाड़ियों के बीच महिम्न ने शानदार प्रदर्शन किया और ‘यंगेस्ट प्लेयर’ का खिताब अपने नाम किया। महिम्न, धार निवासी सिविल इंजीनियर पीयूष मंडलोई और शिवानी मंडलोई के पुत्र हैं। जिस उम्र में बच्चे ठीक से बोलना और चलना सीखते हैं, उस उम्र में महिम्न शतरंज की बिसात पर समझदारी से चालें चल रहे हैं। वे फिलहाल एक फ्री नर्सरी स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं और उम्र में कई साल बड़े खिलाड़ियों को मात दे रहे हैं। 200 खिलाड़ियों से जीता खिताब
हाल ही में इंदौर में हुए इंडिया ओपन चेस टूर्नामेंट और एफसीसी अखिल भारतीय रैपिड चेस टूर्नामेंट में भी महिम्न ने बेहतरीन खेल दिखाया। प्रतियोगिता में उनकी प्रतिभा सभी के लिए आकर्षण का केंद्र रही। आयोजकों और दर्शकों ने उन्हें प्यार से “नन्हा ग्रैंड मास्टर” कहना शुरू कर दिया है। महिम्न की शतरंज यात्रा एक सामान्य चिंता से शुरू हुई। माता-पिता ने देखा कि वह मोबाइल पर ज्यादा समय बिताने लगे हैं। इसके बाद उन्होंने उसे मोबाइल से हटाकर करीब आठ महीने पहले एक शतरंज अकादमी में दाखिला दिलाया। अकादमी के प्रशिक्षकों ने महज एक सप्ताह में ही उसकी प्रतिभा को पहचान लिया और विशेष प्रशिक्षण देना शुरू किया। नियमित अभ्यास और बिना किसी दबाव के मिले मार्गदर्शन का ही नतीजा है कि इतने कम समय में महिम्न ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना ली। उनकी इस उपलब्धि से परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा धार जिला खुश और गर्व महसूस कर रहा है। शतरंज की दुनिया में महिम्न को भविष्य का बड़ा सितारा माना जा रहा है। देखें तस्वीरें


