सात शहरों से कचरा इकट्‌ठा कर बनाई जाएगी बिजली, अपनाएंगे पीपीपी मॉडल

प्रदेश में अब छोटे- छोटे शहरों से कचरा इकट्‌ठा कर बिजली बनाने की तैयारी है। इसके लिए राज्य सरकार ने पहली बार क्लस्टर बनाकर कचरा से बिजली बनाने का संयंत्र लगाने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए भिलाई-दुर्ग क्लस्टर को चुना गया है। इसके तहत भिलाई, दुर्ग के अलावा रिसाली, भिलाई-चरौदा, राजनांदगांव नगर निगम के साथ ही कुम्हारी और जामुल नगर पालिका को शामिल करते हुए क्लस्टर बनाया गया है। अफसरों का कहना है कि इन शहरों में प्रतिदिन निकलने वाले कचरे की मात्रा इतनी नहीं है कि यहां अलग- अलग संयंत्र लगाया जा सके। इसे देखते हुए राज्य सरकार इन शहरों के कचरे को एक जगह इकट्‌ठा करके कचरे से बिजली बनाने के संयंत्र की स्थापना पर काम कर रही है। संयंत्र लगाने बीएसपी से मांगी गई है जमीन भिलाई- दुर्ग क्लस्टर में बनने वाले इस संयंत्र के लिए जमीन तलाशने की कवायद शुरू हो गई है। बीएसपी टाउनशिप के आसपास संयंत्र लगाने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए भिलाई स्टील प्लांट से जमीन भी मांगी गई है। फिलहाल, कोटनी ग्राम पंचायत को उपयुक्त माना जा रहा है। बीएसपी से सहमति मिलने के बाद समिति संयंत्र लगाने के सभी पहलुओं का परीक्षण करेगी। बता दें कि सभी 7 शहरों में अभी 600- 700 टन कचरा प्रतिदिन निकल रहा है। अकेले भिलाई से प्रतिदिन 350 टन कचरा निकलता है। संकरी में बनता है कचरे से खाद कचरे से बिजली बनाने का यह संयंत्र पीपीपी मॉडल पर बनेगा। एक हजार टन प्रतिदिन कचरे की क्षमता वाला यह बिजली संयंत्र प्रदेश का पहला संयंत्र होगा। अभी सबसे ज्यादा 700 टन प्रतिदिन कचरा रायपुर शहर से निकलता है लेकिन यहां भी कचरे से बिजली नहीं बनती है। रायपुर के संकरी में कचरे से खाद बनाया जाता है। खर्चे का हिसाब लगाने बनाई गई समिति कचरे से बिजली बनाने के संयंत्र को मंजूरी देने से पहले राज्य सरकार इसके खर्च और तकनीकी पक्ष का भी अध्ययन करेगी। इसके लिए राज्य सरकार ने नगरीय प्रशासन विभाग के संचालक के नेतृत्व में 11 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। समिति संयंत्र लगाने के लिए बनाए जा रहे परियोजना के प्रस्ताव का परीक्षण करेगी। इसमें तकनीकी- आर्थिक मूल्यांकन, खर्च और उपयोगिता, निविदा के डाक्यूमेंट बनाने के साथ ही प्राप्त वित्तीय प्रस्तावों का मूल्यांकन और दर मंजूर करने के प्रस्ताव की अनुशंसा करेगी। बता दें कि समिति में सभी 7 शहरों के आयुक्त और मुख्य नगर पालिका अधिकारी भी शामिल किए गए हैं।

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