सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर मौजूद, लेकिन इलाज अधूरा:डेंटल यूनिट में नहीं हो रहा रूट कैनाल ट्रीटमेंट; बच्चा वार्ड 24 घंटे चालू रखने के निर्देश

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोलार में डॉक्टर मौजूद हैं। लेकिन, इलाज की व्यवस्थाएं अधूरी हैं। जिसके कारण मरीजों को इलाज के लिए 10 किमी दूर जेपी अस्पताल जाना पड़ रहा है। इसकी शिकायत लगातार CMHO कार्यालय तक पहुंच रही थी। जिसपर संज्ञान लेते हुए मंगलवार को सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। जहां, उन्होंने प्रसूति, शिशु रोग और ओपीडी सेवाओं की जमीनी हकीकत परखी और मरीजों से सीधे संवाद किया। डॉ. शर्मा ने साफ किया कि अस्पताल में अब शिशु रोग विशेषज्ञ की पदस्थापना हो चुकी है, इसलिए बच्चों को अनावश्यक रूप से रेफर करने के बजाय यहीं भर्ती कर इलाज किया जाए। साथ ही उन्होंने स्टाफ की उपस्थिति, व्यवहार और जवाबदेही को लेकर भी कड़े निर्देश दिए। डेंटल यूनिट में नहीं हो रहा रूट कैनाल ट्रीटमेंट
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोलार में डेंटल यूनिट शुरू हुए लगभग एक साल बीत गया है। इसके बाद भी यहां इलाज की पूरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। वजह है, यूनिट को अब तक डिजिटल एक्सरे मशीन नहीं मिली है। जिससे दांतों को अंदरूनी रूप से कितनी नुकसान पहुंचा है, यह जानकारी डॉक्टर को नहीं मिल रही है। यही नहीं, मशीन ना होने से संस्थान में अब तक सबसे डेंटल की सबसे कॉमन प्रक्रिया रूट कैनाल ट्रीटमेंट तक नहीं हो रहा है। जबकि, यूनिट की शुरुआत के समय स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया था कि इस यूनिट में डेंटल से जुड़ी हर सुविधा मरीजों को मुहैया कराई जाएंगी। जिससे उन्हें जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज ना जाना पड़े। वार्ड से यूनिट तक व्यवस्थाओं का जायजा
अचानक निरीक्षण के दौरान सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रसूति वार्ड, ओपीडी, शिशु रोग वार्ड, पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) और न्यूबॉर्न स्टेबलाइजेशन यूनिट का विस्तार से निरीक्षण किया। उन्होंने प्रत्येक यूनिट में उपलब्ध संसाधनों, मरीजों की संख्या और उपचार व्यवस्था की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान उन्होंने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि सभी विभागों में तय प्रोटोकॉल के अनुसार सेवाएं दी जाएं और मरीजों को अनावश्यक असुविधा न हो। बच्चों को यहीं मिले इलाज, रेफरल में बरती जाए सावधानी
डॉ. शर्मा ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति हो चुकी है, इसलिए बच्चों का इलाज डे केयर तक सीमित न रखा जाए। आवश्यकता होने पर बच्चों को शिशु रोग वार्ड में भर्ती कर समुचित उपचार दिया जाए। उन्होंने कहा कि केवल गंभीर चिकित्सकीय स्थिति में ही बच्चों को उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर किया जाए। इससे न सिर्फ रेफरल का बोझ कम होगा, बल्कि अभिभावकों को भी राहत मिलेगी। हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं पर विशेष फोकस
निरीक्षण के दौरान सीएमएचओ ने उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के प्रबंधन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने संस्था प्रभारी को निर्देश दिए कि संभावित प्रसव तिथि से पहले ही गर्भवती महिलाओं की जांच कर ली जाए और चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार समय पर प्रसव सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने प्रसूता महिलाओं से सीधे संवाद कर उपचार, दवाइयों और आहार की गुणवत्ता को लेकर फीडबैक भी लिया। स्टाफ की समय पर उपस्थिति अनिवार्य
निरीक्षण के बाद डॉ. शर्मा ने अस्पताल के चिकित्सकों और स्टाफ की बैठक ली। उन्होंने सख्त शब्दों में कहा कि चिकित्सक से लेकर हर कर्मचारी को निर्धारित समय पर ओपीडी में उपस्थित रहना अनिवार्य है। सभी कर्मचारियों को अपनी उपस्थिति केवल ‘सार्थक ऐप’ के माध्यम से दर्ज करनी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसी उपस्थिति के आधार पर वेतन आहरण किया जाएगा। मरीजों से व्यवहार पर भी सख्ती
सीएमएचओ ने कहा कि इलाज के साथ-साथ मरीजों और उनके परिजनों से अच्छा व्यवहार भी स्वास्थ्य सेवाओं का अहम हिस्सा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी तरह की शिकायत सामने आती है, तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल में अनुशासन और संवेदनशीलता दोनों बनाए रखना जरूरी है। सेवाओं की नियमित समीक्षा होगी
निरीक्षण के बाद मीडिया से चर्चा में डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि शिशु रोग विशेषज्ञ की पदस्थापना के बाद शिशु रोग इकाई की सेवाओं को और मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्टाफ की उपस्थिति और कार्यप्रणाली की नियमित समीक्षा की जाएगी, ताकि अस्पताल में मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में लगातार सुधार हो सके।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *