वैदिक पंचांग के अनुसार 21 सितंबर को साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण लगेगा। यह आंशिक ग्रहण होगा, जो भारत में नजर नहीं आएगा। भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल लागू नहीं होगा। ऐसे में सभी धार्मिक कार्य अपने समयानुसार होंगे। खगोलविद गोविंद दाधीच ने बताया- पृथ्वी और सूर्य के बीच में चंद्रमा कहीं न कहीं जरूर आएगा। कई बार उसका एंगल महासागर से निकल जाता है। इसलिए वो कई बार नजर नहीं आता। चूंकी वहां मानव मौजूद नहीं होते हैं। इसलिए वो नजर नहीं आता। ग्रहण का खेल एंगल और शैडो का होता है। यदि उस एंगल पर कोई आता है तो चंद्रमा सूर्य के उतने भाग को ढक लेगा। जब तक चंद्रमा क्रॉस नहीं होता तब तक सूर्य उतने एंगल पर नजर नहीं आएगा। चंद्रमा के निकलते से ही सूर्य हमें दिखने लग जाएगा। ग्रहण का समय और संयोग ज्योतिष परिषद एवं शोध संस्थान के अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य डॉ. पंडित पुरुषोत्तम गौड़ ने बताया- यह सूर्य ग्रहण आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को कन्या राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा। ग्रहण का आरंभ 21 सितंबर की रात 11 बजे होगा और यह 22 सितंबर की सुबह 3 बजकर 23 मिनट तक चलेगा। इस दिन पितृ विसर्जनी अमावस्या, जिसे सर्वपितृ अमावस्या या महालया अमावस्या भी कहा जाता है, का विशेष संयोग बन रहा है। सर्वपितृ अमावस्या की तिथि 21 सितंबर की रात 12 बजकर 17 मिनट से शुरू होकर 22 सितंबर की रात 1 बजकर 23 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार यह पर्व 21 सितंबर को ही मनाया जाएगा। इस बार पूर्वा फाल्गुनी और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के साथ चतुष्पद करण का विशेष योग भी बन रहा है। सर्वपितृ अमावस्या का महत्व सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष का आखिरी दिन होता है। इसे महालया अमावस्या भी कहा जाता है। माना जाता है कि यह दिन पितरों की विदाई का दिन होता है। पंडित गौड़ ने बताया कि इस दिन पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट कर उनका आशीर्वाद लेना अत्यंत फलदायी माना जाता है। पितरों को प्रसन्न करने के उपाय ग्रहण के दौरान किन बातों का रखें ध्यान पंडित गौड़ ने बताया कि सर्वपितृ अमावस्या के दिन कुछ कार्यों से बचना चाहिए। ग्रहण और अमावस्या का विशेष प्रभाव इस बार ग्रहण और सर्वपितृ अमावस्या का संयोग बन रहा है। हालांकि भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, लेकिन ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इसका असर प्रकृति और जीवन पर अवश्य पड़ सकता है। वहीं अमावस्या के दिन पूर्वजों का स्मरण और तर्पण करने से जीवन में शांति, समृद्धि और पितृ कृपा की प्राप्ति होती है।
कहां दिखेगा सूर्य ग्रहण सितंबर का यह आंशिक सूर्य ग्रहण दक्षिणी प्रशांत महासागर, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, अटलांटिक महासागर, हिंद महासागर, दक्षिण महासागर, पोलिनेशिया, मेलानेशिया, नॉरफ़ॉक द्वीप, आइलैंड, क्राइस्टचर्च और वेलिंग्टन सहित कई देशों में नजर आएगा। इन राशियों पर पड़ सकता है असर शुभ प्रभाव वाली राशियां


