साल की अंतिम मासिक शिवरात्रि आज, भगवान शिव, मां पार्वती को समर्पित है तिथि

भास्कर न्यूज | जालंधर वर्ष 2025 की अंतिम मासिक शिवरात्रि 18 दिसंबर को है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। दिसंबर में पौष मास की मासिक शिवरात्रि को साल के समापन का प्रतीक भी माना जाता है। मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने से कभी न खत्म होने वाला पुण्य मिलता है। धार्मिक मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से शिवजी की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही मनोवांछित फल मिलता है। शिव दुर्गा खाटू श्याम मंदिर के पुजारी गौतम भार्गव ने बताया कि मासिक शिवरात्रि भगवान भोलेनाथ की प्रिय तिथि है। इस दिन व्रत रखकर विधि-विधान के साथ पूजन व व्रत करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के सभी कष्टों को दूर करते हैं। मान्यता के अनुसार, शिवरात्रि के दिन व्रत रखने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और सकारात्मकता का संचार होता है। समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए शिवरात्रि के दिन शिवलिंग का रुद्राभिषेक करना बहुत शुभ फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि कुंवारे लोग इस दिन का व्रत रखें तो उन्हें इच्छानुसार जीवनसाथी मिलता है और शादीशुदा लोगों के जीवन की समस्याएं दूर होती हैं। उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म में पति की लंबी आयु, बच्चे के अच्छे स्वास्थ के लिए कई व्रत किए जाते हैं लेकिन एक ऐसा व्रत है जिसके प्रभाव से पूरे परिवार का कल्याण होता है। 1. शिवरात्रि के दिन प्रातः जल्दी उठकर नित्य क्रिया से निवृत्त होकर स्नान आदि करें। 2. सबसे पहले शिव जी की प्रतिमा के समक्ष पूजा स्थान में दीप प्रज्वलित करें। 3. यदि घर में शिवलिंग है तो दूध और गंगाजल आदि से अभिषेक करें। 4. शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा आदि अवश्य अर्पित करें। इस दिन भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा भी करनी चाहिए। 5. पूजा करते समय नम: शिवाय मंत्र का उच्चारण करते रहें। भगवान शिव को भोग लगाएं और आरती करें।

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