कोंडागांव जिले के ग्राम आलोर स्थित मां लिंगेश्वरी माता मंदिर बुधवार को तड़के 3 बजे गुफा से पत्थर हटाए जाने के साथ खुलेगा। इसके बाद मंदिर समिति के सदस्य और पुजारी पूजा करेंगे। फिर आम लोग पूजा कर सकेंगे। यह साल में केवल एक दिन के लिए खुलता है। इस मंदिर में शिवलिंग के स्वरूप में माता विराजमान हैं। यह मंदिर संतान की मन्नत के लिए विख्यात है और हजारों भक्त दर्शन करने आते हैं। दर्शन के लिए तीन दिन पहले रविवार से ही लोगों की लाइन लगनी शुरू हो गई है। सोमवार को ही यहां करीब 500 मीटर की लाइन लग चुकी है। वहीं अंबिकापुर, राजनांदगांव, रायगढ़, ओडिशा, आंध्रप्रदेश के लोग पहुंच चुके हैं। वैसे यहां पूजा की शुरुआत करीब 200 साल पहले हुई थी। माना जाता है कि गांव के ही दो लोग इस पहाड़ पर शिकार के लिए पहुंचे थे। दिनभर शिकार नहीं दिखने और अंधेरा होने पर वे शाम को लौटने लगे। उन्हें एक खरगोश दिखा। जिसे उन्होंने तीर से निशाना बनाया। वह खरगोश पहाड़ की गुफा में घुस गया, जिसका द्वार संकरा था। वह उसे ढूंढ़ते हुए उस गुफा तक पहुंचे। देर शाम हो जाने के कारण उन लोगों ने गुफा को पत्थरों से चारों तरफ से बंद कर दिया, ताकि सुबह आकर वह खरगोश को साथ ले जा सकें। दूसरे दिन लौटे तो एक व्यक्ति जैसे तैसे गुफा के अंदर घुसा और एक बाहर ही खड़ा रहा। अंदर में अंधेरा होने पर आग जलाकर देखा तो वहां खरगोश नहीं था। पदचिह्न से तय होता है, ये साल शुभ रहेगा या अशुभ यहां भव्य मेला लगेगा। 3 किमी पहले गाड़ियों को रोकने बैरिकेट लगा दिए गए हैं। दिनभर दर्शन के बाद मंदिर के पट पत्थरों से ढके जाएंगे, उससे पहले गुफा परिसर में रेत बिछाई जाएगी। अगले साल इस रेत पर जिस भी जानवर के पदचिह्न मिलेंगे, उस आधार पर आने वाला साल कैसा रहेगा, ये तय होगा। शेर, चीता, हाथी, खरगोश के पदचिह्न को शुभ माना जाता है, जबकि मनुष्य और बिल्ली के पद अशुभ। बीते साल यहां पर बिल्ली के पदचिह्न दिखे थे, जो अशुभ था। माना जाता है कि इसी कारण साल भर इस क्षेत्र में सड़क हादसे ज्यादा हुए।


