पौष माह की अमावस्या पर मप्र की जीवन दायिनी मां नर्मदा नदी में हजारों श्रद्धालुओं ने सोमवार को आस्था की डुबकी लगाई। तड़के 5 बजे से ही कड़कड़ाती ठंड में श्रद्धालुओं के स्नान का सिलसिला शुरू हुआ। नर्मदापुरम में प्राचीन सेठानी घाट, विवेकानंद घाट, परमहंस घाट, कोरी घाट, पर्यटन घाट, बांद्राभान संगम समेत जिलेभर के घाटों पर सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ लगी हुई है। यह साल 2024 की अंतिम सोमवती अमावस्या है। यह सोमवती अमावस्या हिंदू धर्म व सनातनियों के लिए इसलिए भी खास है कि वर्ष 2025 में सोमवती अमावस्या नहीं पड़ रही है। सनातियों को इसके लिए 15 जून 2026 का इंतजार करना पड़ेगा। पंडितों का कहना है कि यह सोमवती अमावस्या इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चंद्रमा गुरु ग्रह की राशि धनु में गोचर कर रहे हैं। इसके साथ ही कुंभ राशि में शुक्र व शनि की युति है। वृद्धि योग, ध्रुव योग और मूल नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है, जिससे सोमवती अमावस्या का महत्व अधिक बढ़ गया है। इस अवसर पर दान पुण्य और पूजा अर्चना करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। घरों में जहां पितरों के निमित्त दानपुण्य और तर्पण व दीपदान किया जाएगा। प्राचीन सेठानी घाट पर सुबह 4 बजे से ही श्रद्धालु पहुंचने लगे। 5 से बजे सोमवती अमावस्या का स्नान शुरू हुआ। स्नान के साथ ही श्रद्धालुओं ने पूजन पाठ और कथा कराई। घाट पर दान पुण्य भी किए। पुलिस और होमगार्ड जवान रहे तैनात श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए सभी घाटों पर पुलिस और होमगार्ड जवान तैनात है। लगातार बोट से गश्ती की जा रही और लोगों को गहरे पानी में जाने से रोक जा रहा है। पितृदोष वाले जातक को मिलेगी राहत सोमवती अमावस्या के दिन स्नान व दान का अलग ही महत्व है। अमावस्या तिथि के स्वामी पितर देव माने जाते हैं इस कारण इस दिन पितरों के लिए खासतौर पर धर्म-कर्म करने की परंपरा है। इस दिन पितृ दोष वाले जातक दान पुण्य कर पितर तर्पण करते है तो उन्हें पितृदोष से मुक्ति मिलती है। गरुड़ पुराण में अमावस्या का महत्व गरुड़ पुराण में अमावस्या पर पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध, धूप-ध्यान करने की परंपरा का उल्लेख है। इन कर्मों से पितर तृप्त होते हैं, शांति पाते हैं और घर-परिवार को आशीर्वाद देते हैं। देखें अमावस्या के दिन की झलकियां


