सावधान…:रोज 50 से ज्यादा मोबाइल चोरी, सिम से हो रहा फर्जीवाड़ा नए कानून में एक भी केस दर्ज नहीं, थाने से लौटा रही पुलिस

सावधान… सब्जी लेने गए व्यापारी का मोबाइल ले भागा, फिर दो बैंक खातों से निकाले 1.85 लाख रायपुर के एक कारोबारी का मोबाइल चोरी कर उसके खाते से रुपए निकालने का मामला सामने आया है। व्यापारी जब सब्जी ले रहा था, इसी दौरान आरोपी ने मोबाइल चोरी कर लिया। इसके बाद व्यापारी के दो अलग-अलग बैंक खाते से 1 लाख 85 हजार रुपए ट्रांसफर कर लिए गए। मामला तेलीबांधा थाना क्षेत्र का है। प्रार्थी की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश में जुट गई है। पुलिस के अनुसार प्रार्थी गोविंद राम वाधवानी ने बताया कि 22 जून की सुबह 9 बजे वह सब्जी लेने के लिए तेलीबांधा आया था। इस दौरान पास में ही एक व्यक्ति आकर खड़ा हो गया। उसने जेब में रखे मोबाइल पर झपट्टा मारा और फरार हो गया। कुछ समय बाद मेरे एक बैंक खाते से 85 हजार और एक खाते से 1 लाख रुपए पार हो गए। इसकी जानकारी मुझे दूसरे दिन मिली, जब मैं बैंक पहुंचा था। क्राइम ब्रांच डीएसपी संजय सिंह ने बताया कि मोबाइल चोरी करने वाला गैंग सक्रिय है। गैंग के लोग चोरी के बाद मोबाइल व सिम ठग गिरोह को दे देते हैं। सिम को दूसरे मोबाइल में लगाकर नेट बैंकिंग शुरू या फिर यूपीआई शुरू की जाती है। इसके बाद सारे पासवर्ड रिकवर कर खाते से पैसे निकाल लेते हैं। मोबाइल नंबर बैंक से लिंक होता है, इसलिए ठग इसका फायदा उठा रहे हैं। इस तरह की घटनाएं बढ़ रही है। पुलिस इसमें जांच कर रही है। रायपुर में रोजाना 50 से ज्यादा मोबाइल चोरी हो रहे हैं, लेकिन उसमें केस दर्ज नहीं किया जा रहा है। प्रार्थी जब मोबाइल चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराने पुलिस थाने पहुंचता है तो गुम मोबाइल की शिकायत दर्ज की जाती है।
बहुत ही कम मामले में चोरी का केस दर्ज होता है। उसमें भी बीएनएस की धारा 303 के तहत केस दर्ज किया जाता है। जबकि मोबाइल या कंप्यूटर या संचार वाले इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की चोरी होने पर आईटी एक्ट की धारा 66बी के तहत एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। क्योंकि चोर अब मोबाइल का दुरुपयोग नहीं कर रहे हैं, बल्कि सिम का दुरुपयोग करने लगे। सिम से नेट बैंकिंग शुरू कर या यूपीआई चालू कर खाते में सेंध लगा रहे हैं। ऐसे में इस धारा में पुलिस को एफआईआर करनी चाहिए। पुलिस के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले 6 माह (जनवरी से जून) में 9000 मोबाइल गुम की शिकायतें दर्ज की गई हैं। जबकि इनमें से केवल 71 में ही चोरी के मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं पिछले साल के आंकड़ों को देखें तो 11000 मोबाइल गुम होने की शिकायतें पुलिस ने दर्ज की है। इसमें से 90 फीसदी मोबाइल लोगों के पॉकेट, पर्स और गाड़ी से पार हुआ है। यहां तक घरों में घुसकर मोबाइल की चोरी हो रही है। लेकिन इन सब के बावजूद पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं कर रही है। पुलिस ने पिछले साल 2000 मोबाइल ढूंढ़कर लोगों काे दिए। जबकि इस साल 9000 मोबाइल में से सिर्फ 800 ही ढूंढ पाए। शहर में चार-पांच घटनाएं होने के बाद जागी पुलिस, महिलाएं भी निशाने पर
मोबाइल चोरी की घटना शंकर नगर कपड़ा कारोबारी हरभजन सिंह राजपाल के साथ हुई। वह सब्जी लेने शास्त्री मार्केट गए थे, जहां से मोबाइल चोरी हो गया। उन्होंने गोलबाजार थाने में पॉकेट मारी की शिकायत की। वहां उनका आवेदन नहीं लिया गया। उन्हें गुम मोबाइल का आवेदन दे दिया गया। पांच दिन बाद हरभजन के खाते से अलग-अलग किस्त में 6.50 लाख रुपए निकाल लिया गया। इसकी शिकायत लेकर जब वह दोबारा पुलिस के पास पहुंचा तब जाकर केस दर्ज किया गया। पुलिस की जांच में यह सामने आया है कि इसी तरह की घटना एक महिला और इंजीनियर के साथ भी हुई है। गुढ़ियारी इलाके में भी एक कारोबारी से ऐसे ही ठगी हुई है। शिकायत केवल पोर्टल में दर्ज
पुलिस थानों में जब भी कोई पीड़ित मोबाइल चोरी, लूट या गुम होने की शिकायत लेकर पहुंचता है तो उसकी शिकायत सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (सीईआईआर) पोर्टल में दर्ज कर दी जाती है। नंबर ब्लॉक कराया जा रहा है। पीड़ित अपनी शिकायत लेकर वापस लौट आते हैं। इसके लिए भी कई थानों में 50 से 100 रुपए तक लिए जाते हैं।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *