साहित्य समिति के वासंती आयोजन में पंडवानी के सुरों की रही गूंज

भास्कर न्यूज | राजनांदगांव छत्तीसगढ़ साहित्य समिति और कस्तूरबा महिला मंडल के तत्वावधान में बसंत पंचमी पर मां सरस्वती का पूजन किया। इस मौके पर बगरो- बसंत पर साहित्यिक परिचर्चा का आयोजन किया गया। पंडवानी गायिका तरुणा साहू ने पंडवानी की प्रस्तुती दी। रेल सुरक्षा बल अधिकारी तरुणा साहू की पंडवानी सुनने बड़ी संख्या में कस्तूरबा मंडल की समाज सेवी महिलाएं एवं कवि, साहित्यकार पहुंचे थे। मुख्य अतिथि वरिष्ठ समाजसेवी रत्ना ओस्तवाल ने साहित्यकार सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला” और महादेवी वर्मा का वृतांत सुनाया। कृषि विस्तार अधिकारी व कवि सुषमा शुक्ला ने राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त की यशोधरा कविता की तरह “मैं बुद्ध नहीं यशोधरा बनना चाहती हूं’ कविता सुनाकर नारी पीड़ा को व्यंजित किया। साहित्य समिति के अध्यक्ष व छग राजभाषा आयोग के जिला समन्वयक कवि, आत्माराम कोशा “अमात्य” ने “ढर जाए जे आंसू ते मोती जम जाए ये बज्रा हीरा ये’, सुनाकर छत्तीसगढ़ की दया- मया- पीरा का बखान किया। अध्यक्षता कर रहे कमला कालेज के प्रो. डॉ. कृष्ण कुमार दीक्षित ने ऋतु राज बसंत के आगमन के संदर्भ में कामदेव के अनंग होने की कथा से बसंत पंचमी की बधाई दी। चेंबर ऑफ कॉमर्स अध्यक्ष शरद अग्रवाल व आशीष जयकिशन चितलांग्या ने बसंत पंचमी कार्यक्रम को सराहा। इन कलाकारों ने दी प्रस्तुति: पंडवानी गायन में हारमोनियम पर संगत चतुर दाऊ, तबले पर जौहर मनहरण साहू “मनु” ने साथ दिया। रागी की भूमिका में नत्थन दास, बिसराम साहू रहे। कस्तूरबा की अध्यक्ष अलका जानी, रत्ना ओस्तवाल व पंडवानी गायिका तरुणा साहू, कोशा ने मां सरस्वती की पूजा कर की । आराधना मंच की प्रभा बरडिया, कस्तूरबा की जनक बाई गुप्ता, शकुन गुप्ता, दुर्गा खंडेलवाल, मोना लोहिया, भगवती खंडेलवाल, प्राचार्य प्रवीण गुप्ता, सीताराम वैष्णव आदि मौजूद रहे। खतरे में है कुर्सी… सुनाकर गिरीश ने तालियां बटोरी साहित्य समिति के उपाध्यक्ष गिरीश ठक्कर “स्वर्गीय” ने “कुर्सी खतरे में है’ सहित विभिन्न क्षणिकाएं सुनाकर तालियां बटोरी। संचालन कर रहे कवि शैलेश गुप्ता की सुपुत्री नवोदित वसुधा गुप्ता ने अपनी चुटीली रचना पाठ से प्रशंसा पाई। साहित्य समिति के सचिव कथाकार मानसिंह मौलिक ने “महुआ संग मस्ती में डूबे, पलाश बिखेरे रंग’ सुनाकर तालियां बटोरी। समाज सेवी किरण अग्रवाल ने बसंत पंचमी पर विद्यारंभ संस्कार की महत्ता को विस्तार से बताया। माला शुक्ला प्रेरक काव्य-पाठ किया।

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