सिंगरौली जिले में इस खरीफ सीजन में रिकॉर्ड 18 लाख 90 हजार क्विंटल धान की खरीदी की गई है। हालांकि, जिले में भंडारण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, क्योंकि उपलब्ध गोदामों की कुल क्षमता केवल 10 लाख 50 हजार क्विंटल है। जिले के वेयरहाउस में 6 लाख क्विंटल धान रखने की जगह है, जबकि कोऑपरेटिव सोसायटियों के पास लगभग 4 लाख 50 हजार क्विंटल भंडारण की क्षमता है। इस प्रकार, लगभग 8 लाख 40 हजार क्विंटल धान के भंडारण के लिए जिले में कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है। यह स्थिति और भी गंभीर हो गई है क्योंकि मिलरों ने अभी तक धान का उठाव शुरू नहीं किया है। सूत्रों के अनुसार, मिलरों को पिछले वर्ष की प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं हुआ है, जिसके कारण वे धान उठाने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। परिणामस्वरूप, बड़ी मात्रा में धान खुले आसमान के नीचे ईंट-पत्थर बिछाकर रखा जा रहा है। यदि इस दौरान बारिश होती है, तो खुले में रखे धान के खराब होने की आशंका बढ़ जाएगी। इससे शासन और किसानों, दोनों को करोड़ों रुपये का बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। इस मामले पर सहकारिता उपयुक्त पी.के. मिश्रा ने बताया कि विभाग बारिश से धान को बचाने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मिलरों से लगातार बातचीत की जा रही है। मिश्रा ने स्वीकार किया कि मौजूदा हालात को देखते हुए जिले में भंडारण क्षमता बढ़ाना अनिवार्य हो गया है और इसके लिए जल्द कदम उठाने की आवश्यकता है।


