भोपाल पहुंचे छत्तीसगढ़ के पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने कहा कि सरकारें आय के स्त्रोत बनाने के लिए वस्तुओं पर जीएसटी बढ़ा रही है। उदाहरण के लिए हाल ही में पोपकॉर्न के 3 अव्यवहारिक दर 5, 12 और 18 कर दिए हैं। टीएस सिंहदेव ने भोपाल में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। सिंहदेव ने जीएसटी के स्लैब में बदलाव करने की मांग की। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे, मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक, अमरपाटन विधायक राजेन्द्र कुमार सिंह मौजूद थे। टीएस सिंहदेव ने कहा वर्तमान में जीएसटी के 9 स्लैब प्रचलन में है। इनका सरलीकरण जरूरी है और अधिकतम 2 या 3 जीएसटी के स्लैब होना चाहिए। सिंहदेव ने कहा- आज देश में जो स्थिति हम देख रहे हैं। इसमें वन नेशन वन टैक्स के नाम पर जो व्यवस्था लागू की गई है। वो “अमीरों की, अमीरों द्वारा और अमीरों के लिए” हम इस व्यवस्था को इस रूप में देख पा रहे हैं। जब देश में पहले डायरेक्ट टैक्स से राजस्व केंद्र सरकार के पास आता था। तो सरकारों के रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा इनकम टैक्स हुआ करता था। उत्पाद शुल्क, बिक्री कर था, जिसे बाद में वैट के रूप में संग्रह किया जाता था, लेकिन कुछ आंकड़ों के माध्यम से मैं यह समझाना चाहूंगा कि वर्तमान स्थिति क्या हो गई है। इसे ऑफ द रिच, बाय द रिच, फॉर द रिच क्यों कहा जा रहा है? सबसे ज्यादा आय वाली 10% आबादी मात्र 3% जीएसटी दे रही सिंहदेव ने कहा, “मैं भी इन आंकड़ों को देखकर हैरान रह गया। आज देश की सबसे अधिक आय वाली 10 प्रतिशत आबादी जीएसटी के माध्यम से कुल राजस्व में कितना योगदान दे रही है, इसका अनुमान आप लगा सकते हैं। देश के सबसे अमीर 10 प्रतिशत नागरिक जीएसटी के जरिए देश के विकास और अन्य गतिविधियों को चलाने के लिए मात्र 3 प्रतिशत का ही योगदान दे रहे हैं।” जबकि देश की निचली 50% आबादी 64% जीएसटी में योगदान दे रही है। यह ऑफ द रिच, बाय द रिच, फॉर द रिच क्यों कहा जा रहा है? क्योंकि जो टैक्स स्ट्रक्चर बना है और बार-बार कहा जाता है कि अमीरी और गरीबी के बीच की खाई बढ़ती जा रही है। जो ज्यादा अमीर हैं, उनके ऊपर टैक्स का भार कम है। बल्कि जिनके आमदनी कम हैं, उनके ऊपर टैक्स का भार ज्यादा है। नीचे के 50 प्रतिशत लोगों के पास अपने घर चलाने के लिए कोई पैसा नहीं है। आप समझ सकते हैं कि यह सारी राशि जो भी सामान वे खरीद रहे हैं, उसके भुगतान के लिए लग जाती है। इसमें सिर्फ गरीब नहीं हैं, बड़ी संख्या में मध्यम वर्ग भी है। जीएसटी जल्दबाजी में देश पर थोपा गया जीएसटी कानून को किस तरह से लागू किया गया, यह हम सबने देखा है। जब देश आजाद हुआ था तो संसद के संयुक्त सत्र की तरह ही एक सत्र बुलाया गया था। मान लीजिए कि पता नहीं देश में कौन सी क्रांतिकारी व्यवस्था पुनः शुरू होने जा रही है। उस समय की सरकार में और रात के 12 बजे लाए हुए कानून में एक हजार से ज्यादा संशोधन किए गए हैं। जो व्यापारी वर्ग है। कहने को तो ऑनलाइन सुविधाएं हैं। मैं अपना जीएसटी रिटर्न ऑनलाइन भर सकता हूं क्या? क्या मैं बिना सीए के भर सकता हूं? मैं इसका भुगतान नहीं कर सकता, इसलिए सामान्य नागरिक, जिन्हें आज जीएसटी भरने की जरूरत है, उन्हें मजबूरन सीए के पास जाना पड़ता है और उन्हें फीस देनी पड़ती है और फिर अपना रिटर्न दाखिल करना पड़ता है।


