सिम्स में युवती के बाहर निकले दांतों की सर्जरी:लाखों का इलाज आयुष्मान कार्ड से मुफ्त में हुआ, आर्थोगनेथिक सर्जरी से बदली जिंदगी

बिलासपुर के सिम्स अस्पताल के दंत चिकित्सा विभाग ने एक 29 वर्षीय युवती के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है। डॉक्टरों ने उसके बाहर निकले हुए दांतों की आर्थोगनेथिक सर्जरी सफलतापूर्वक की, जिससे उसकी हीन भावना समाप्त हुई। लाखों रुपए की लागत वाली यह जटिल सर्जरी सिम्स में आयुष्मान कार्ड के माध्यम से पूरी तरह निःशुल्क की गई। यह सुविधा लिंगियाडीह निवासी युवती के लिए एक बड़ी राहत साबित हुई। चेहरे की बनावट से नाखुश थी युवती युवती अपने चेहरे की बनावट से नाखुश थी। हंसते समय उसके ऊपरी दांत बाहर निकले हुए दिखते थे और मसूड़े भी अधिक दिखाई देते थे। इस समस्या के कारण वह अक्सर हीन भावना से ग्रस्त रहती थी और दुखी रहती थी। अपनी परेशानी लेकर वह सिम्स के दंत चिकित्सा विभाग पहुंची। आवश्यक एक्स-रे, सीटी स्कैन और रक्त जांच के बाद डॉक्टरों ने पाया कि उसका ऊपरी जबड़ा सामान्य से बड़ा था, होंठ छोटे थे, दांत बाहर निकले हुए थे, और निचला जबड़ा छोटा था। उपचार की रूपरेखा तैयार की गई, जिसमें पहले दांतों में ब्रेसेस (तार) लगाकर उनके विन्यास को ठीक किया गया और उन्हें अंदर किया गया। इसके बाद सर्जरी के माध्यम से जबड़े की हड्डियों को सही आकार दिया गया। 6 से 7 घंटे चली सर्जरी यह जटिल सर्जरी लगभग 6 से 7 घंटे तक चली और इसे तीन मुख्य चरणों में पूरा किया गया। पहले चरण में, ऊपरी जबड़े को काटकर छोटा किया गया, जिसे ‘लेफोर्ट-1 ओस्टियोटोमी’ कहा जाता है। दूसरे चरण में, निचले जबड़े को आगे बढ़ाकर हड्डियों को बराबर किया गया, जिसे ‘बाइलेटरल सैजिटल स्प्लिट ओस्टियोटोमी (BSSO)’ कहते हैं। अंततः, ठुड्डी की हड्डी को सही आकार दिया गया, जिसे ‘जीनियोप्लास्टी’ कहते हैं। इस प्रकार, सभी हड्डियों को एक नए प्रारूप में व्यवस्थित किया गया, जिससे युवती को एक संतुलित चेहरा मिला। सिम्स प्रशासन का दावा है कि छत्तीसगढ़ का यह पहला मेडिकल कॉलेज अस्पताल है जहां दंत चिकित्सा विभाग द्वारा निरंतर इस प्रकार की आर्थोगनेथिक सर्जरी की जाती है। निजी अस्पतालों में इस तरह के इलाज पर आमतौर पर 2 से 3 लाख रुपये तक का खर्च आता है। इन्होंने किया ऑपरेशन
उक्त जटिल ऑपरेशन दंत चिकित्सा विभाग के डॉ. भूपेन्द्र कश्यप के मार्गदर्शन में विभागाध्यक्ष एवं ओरल एंड मैक्सिलो-फेसिअल सर्जन डॉ. संदीप प्रकाश एवं उनकी टीम ने किया। डॉक्टरों की टीम में डॉ. जंडेल सिंह ठाकुर, डॉ. केतकी कीनीकर, डॉ. हेमलता राजमणि, डॉ. प्रकाश खरे, डॉ. सोनल पटेल, रेडियो-डायग्नेसिस विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह एवं निश्चेतना विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति शामिल रहे।

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