रायपुर में कांग्रेस से आए नेता को पद, पेंड्रा में विवाद, गरियाबंद में अचानक बदला नाम छत्तीसगढ़ भाजपा में मंडल अध्यक्षों की नियुक्तियों को लेकर कई जगह विवाद की स्थिति निर्मित हो गई है। रायपुर, गरियाबंद, पेंड्रा और झाखरपारा में कार्यकर्ताओं के बीच हाथापाई तक की घटना हुई है। विवाद का वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। दरअसल रायपुर के माना मंडल अध्यक्ष के चुनाव के दौरान भाजपा मुख्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में हंगामा हुआ। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जिस भीमवंत निषाद को मंडल अध्यक्ष बनाया गया है वह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आया है। नाराज कार्यकर्ताओं ने इस दौरान रायपुर ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू के सामने जमकर नारेबाजी भी की।
गरियाबंद में अध्यक्ष बदलने पर बवाल
गरियाबंद में मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति के दौरान नाम बदल दिया। झाखरपारा में पहले उमाशंकर को मंडल अध्यक्ष बनाया गया, लेकिन बाद में भगवानों बेहेरा का नाम घोषित कर दिया गया। जिससे समाज के लोगों ने नाराजगी जताई। फिंगेश्वर में वरिष्ठ नेता भागवत हरित की बहू मंजुलता को अध्यक्ष बनाया गया। इस पर एक कार्यकर्ता ने दूसरे को थप्पड़ मार दिया। कार्यकर्ता मुकेश साहू को अध्यक्ष बनाने की मांग कर रहे थे। लेकिन ऐसा नहीं होने के कारण विवाद हुआ। जीपीएम में विवाद, डोंगरगढ़ में भी हंगामा
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में मरवाही विधानसभा के तहत आने वाले सभी पांच भाजपा मंडलों के अध्यक्षों का चुनाव कर लिया गया है। मरवाही दक्षिण के चुनाव के दौरान कार्यकर्ताओं के बीच विवाद की भी खबर सामने आई है। मरवाही दक्षिण मंडल में हेमचंद मराबी को मंडल अध्यक्ष चुना गया। लेकिन बीजेपी के कुछ नेताओं का आरोप है कि, संगठन ने अन्य दावेदारों को नकार दिया और मनमाने तरीके से हेमचंद को मंडल अध्यक्ष बनाने की घोषणा कर दी। पेंड्रा ग्रामीण मंडल अध्यक्ष के लिए रामकुमार पुरी, सेमरा मंडल में अजय तिवारी, मरवाही उत्तर में कमलेश यादव, मरवाही मध्य मंडल की कमान अजय रजक को मिली। डोंगरगढ़ में भी इसे लेकर हंगामा देखने का मिला। भाजपा में सिर फुटव्वल की स्थिति : कांग्रेस
कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि, भाजपा के संगठन चुनाव में मचे सिर फुटव्वल को लेकर अनुशासन की पोल खुल गई है। भाजपा में लोकतंत्र नहीं है, वहां तानाशाही हावी है। मंडल अध्यक्ष के चुनाव में कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट, गाली-गलौज और धक्का-मुक्की हो रही है। इसने भाजपा संगठन के चरित्र का पर्दाफाश कर दिया है। मंडल अध्यक्ष के चुनाव के लिए जिस तरह से कहा गया था कि, कार्यकर्ताओं को वोट देने का अधिकार होगा। लेकिन पर्यवेक्षक और प्रभारी बनाकर भेजे जाते हैं, वो कार्यकर्ताओं को इकट्ठा करते हैं और वहां लिफाफा फाड़ते हैं। घोषणा करते हैं कि यह आपका मंडल अध्यक्ष होगा। यही बीजेपी की तानाशाही है।


