भास्कर न्यूज | राजिम कुंभ मेले में विभिन्न अखाड़ों के साधु-संतों का आगमन लगातार जारी है। अब तक 40 से अधिक संत-महात्मा राजिम पहुंच चुके हैं, जिनमें दशनाम जूना अखाड़ा और आवाहन अखाड़ा प्रमुख रूप से शामिल हैं। जूना अखाड़ा से पहुंचे महंत नीलगिरी महाराज श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। महंत नीलगिरी महाराज 1100 रुद्राक्ष को दिनभर अपने सिर पर धारण करते हैं और केवल रात्रि विश्राम के समय ही उन्हें उतारते हैं। श्रद्धालुओं द्वारा पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि रुद्राक्ष धारण करना उनकी भक्ति और साधना का अभिन्न हिस्सा है। भजन और साधना के दौरान वे निरंतर रुद्राक्ष धारण किए रहते हैं तथा रात्रि में विश्राम के समय ही उन्हें हटाते हैं। महंत नीलगिरी महाराज ने बताया कि विशेष धार्मिक अनुष्ठानों और कठिन साधना के समय रुद्राक्षों की संख्या बढ़ाई जाती है। उन्होंने इसे 12 वर्षों की तपस्या का प्रतिफल बताया। उन्होंने कहा कि वे राजिम कुंभ मेला में पहली बार आए हैं और मेला समापन तक यहीं प्रवास करेंगे।


