सिलीसेढ़ झील को मिली बड़ी पहचान:फलौदी के खींचन और उदयपुर के मेनार के बाद सिलीसेढ़ झील भी रामसर साइट में शामिल

जिले के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शुमार ऐतिहासिक सिलीसेढ़ झील को द कन्वेंशन ऑन वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि पर कन्वेंशन) ने रामसर साइट घोषित किया है। राजस्थान के फलौदी में खींचन और उदयपुर में मेनार के बाद सिलीसेढ झील राजस्थान की 5वीं रामसर साइट के रूप में घोषित किया गया है। अब सिलीसेढ़ झील को रामसर साइट में शामिल करने से विश्व एक पहचान मिल गई है। जिससे टूरिस्ट और विकास बढ़ेगा। केंद्रीय मंत्री तथा अलवर सांसद भूपेंद्र यादव के प्रयासों से रामसर कनवेंशन के तहत अलवर की प्रतिष्ठित सिलीसेढ़ झील को रामसर साइट घोषित किया गया है। रामसर स्थल के रूप में नामित होने पर सिलीसेढ झील को आर्द्रभूमि (वेटलैंड) के रूप में अंतरराष्ट्रीय मान्यता, संरक्षण प्रयासों में वृद्धि और सतत विकास तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग के अवसर मिलेंगे। यह जैव-विविधता, जल एवं जलवायु सुरक्षा तथा सतत आजीविका के लिए एक सराहनीय उपलब्धि है। केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव ने कहा कि अलवर की इस झील को वैश्विक पहचान मिली है। यह हमारी साझा उपलब्धि है। हम इस रामसर साइट के सम्मान के साथ सिलीसेढ़ झील के आसपास पर्यटन, जैव विविधता और जल संसाधनों के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ ही जलवायु सुरक्षा और सतत आजीविका सुनिश्चित करने के काम को और मज़बूती दे पायेंगे। वन राज्य मंत्री श्री संजय शर्मा ने कहा है कि सिलीसेढ़ झील को रामसर साइट घोषित किया जाना प्रदेश और अलवर के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। जैव विविधता और अनुपम प्रकृति सौन्दर्य से भरपूर है सिलीसेढ झील आकर्षक सारसों से लेकर रंग-बिरंगे किंगफिशर्स तक यह झील पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग के समान है, जहाँ आकाश पंखों की अद्भुत दुनिया से जीवंत हो उठता है। 100 से अधिक पक्षी प्रजातियों को देखने का अवसर और सरिस्का टाइगर रिज़र्व का प्रवेश द्वार होने के कारण यह झील एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी है। 1845 में महाराजा विनय सिंह द्वारा निर्मित यह ऐतिहासिक झील अलवर को पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाई गई थी, जिसका प्रमाण झील के चारों ओर बने जल-वाहिकाओं (एक्वाडक्ट्स) में मिलता है। केंद्रीय वन मंत्री ने जिम्बाब्वे में जुलाई 2025 में आयोजित रामसर कॉप-15 में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए वेटलैंड कन्वेंशन की महासचिव डॉ. मुसोंड़ा मुंम्बा से मुलाकात कर उनके समक्ष सिलीसेढ़ झील के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को साझा करते हुए सिलीसेढ़ झील को रामसर साइट घोषित करने का प्रस्ताव रखा था। 95 रामसर स्थलों के साथ भारत में अब एशिया में सबसे अधिक रामसर साइटें हो गई हैं। इससे पूर्व राजस्थान के फलौदी में खींचन और उदयपुर में मेनार को रामसर स्थल घोषित किया गया था। सिलीसेढ झील राजस्थान की 5वीं रामसर साइट के रूप में घोषित हुई है। रामसर कन्वेंशन में 2,500 से ज्यादा जगह रामसर कन्वेंशन का मुख्य उद्देश्य आर्द्रभूमि का संरक्षण और सतत उपयोग सुनिश्चित करना है, जो विभिन्न प्रकार के पौधों और जानवरों के लिए आवास प्रदान करते हैं। रामसर सूची में शामिल स्थल अंतरराष्ट्रीय महत्व के होते हैं, जो वैश्विक जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रामसर कन्वेंशन न केवल आर्द्रभूमि के संरक्षण पर जोर देता है, बल्कि उनके सतत उपयोग पर भी जोर देता है, जिसका अर्थ है कि स्थानीय समुदायों को आर्द्रभूमि के लाभों का उपयोग करने की अनुमति दी जाती है, जबकि यह सुनिश्चित किया जाता है कि वे नष्ट न हो। रामसर सूची दुनिया भर में 2,500 से ज्यादा स्थलों तक फैली हुई है। रामसर नेटवर्क में शामिल होने से क्या लाभ मिलते हैं

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