सिवनी में गांव-गांव पहुंचेगा ‘कृषि रथ:47 पंचायतों में सिखाए जाएंगे खेती के नए गुर, किसानों की तकदीर बदलेगी

सिवनी जिले की जनपद पंचायत धनौरा के साजपानी गांव से कृषि रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इसी के साथ ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ की भी शुरुआत हो गई है। इस रथ को रवाना करने का मुख्य मकसद किसानों को खेती की नई तकनीकों, सरकारी योजनाओं और प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी देना है। जनपद अध्यक्ष गुलाब सिंह भलावी ने इसे रवाना किया, जो अब क्षेत्र की सभी 47 पंचायतों में जाकर किसानों को जागरूक करेगा। मुख्यमंत्री का संबोधन और कृषि रथ का पूजन साजपानी पंचायत भवन में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान किसानों ने मुख्यमंत्री का लाइव भाषण सुना। इस मौके पर कृषि रथ की विधिवत पूजा-अर्चना भी की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण जुटे, जिन्हें खेती को और बेहतर बनाने के तरीके बताए गए। जैविक और प्राकृतिक खेती पर हुई चर्चा कार्यक्रम के दौरान एक कृषक संगोष्ठी (बैठक) भी रखी गई। इसमें “स्वस्थ खेती, सुरक्षित भविष्य” जैसे विषयों पर विस्तार से बात हुई। विशेषज्ञों ने किसानों को समझाया कि रासायनिक खाद का कम से कम इस्तेमाल करें और प्रकृति को बचाने के लिए जैविक व प्राकृतिक खेती को अपनाएं। वक्ताओं ने जोर दिया कि टिकाऊ खेती ही भविष्य का आधार है। जनप्रतिनिधि और अधिकारियों की रही मौजूदगी पेसा ग्रामसभा अध्यक्ष गुलाब सिंह मर्सकोले की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में सरपंच सुदामा, शिवराम धुर्वे और कई पंचगण मौजूद रहे। साथ ही कृषि विभाग, पशुपालन विभाग और जनपद पंचायत के अधिकारी भी शामिल हुए। अधिकारियों ने किसानों को सरकार की अलग-अलग योजनाओं की जानकारी दी और उन्हें आधुनिक खेती से जुड़ने का आह्वान किया। किसानों इन योजनाओं की जानकारी दी गई इस दौरान किसानों को सरकार की कई योजनाओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्राकृतिक और जैविक खेती, उन्नत बीजों के उपयोग, आधुनिक कृषि यंत्रों पर अनुदान और सिंचाई सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं के बारे में बताया गया। किसानों को मौसम आधारित खेती, फसल विविधीकरण, कीट-रोग प्रबंधन और उत्पादन लागत कम करने के उपाय भी बताए गए। साथ ही, डिजिटल कृषि, ई-नाम मंडी, कृषि ऋण, पशुपालन, मत्स्य पालन और मूल्य संवर्धन के माध्यम से आय बढ़ाने के तरीकों की जानकारी देकर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का संदेश दिया गया।

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