सिस्टम का लीकेज:कोर्ट में बताया-145 करोड़ से लाइनें डालीं, हकीकत-नलों में अभी भी आ रहा गंदा पानी

राजधानी में पेयजल को लेकर सिस्टम का बड़ा झूठ सामने आया है। नगर निगम ने 2018 में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर बताया था कि यूनियन कार्बाइड के पीछे के प्रेम नगर, शिव नगर जैसे मोहल्लों में अमृत योजना के तहत 145 करोड़ रुपए पानी और सीवेज लाइन पर खर्च किए गए हैं। हकीकत में 50 करोड़ रुपए से पानी की लाइन डाल दी गई। लेकिन 7 साल बाद भी सीवेज की लाइन यहां नहीं पड़ पाई है। 95 करोड़ रुपए का यह प्लान कागजों से धरातल पर उतर ही नहीं सका। इलाके में रहने वाले मुबीन बताते हैं कि सालों से हम गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। सीवेज खुले में बह रहा है। पेयजल की लाइनें पड़ी हैं, जिनके वॉल्व इन्हीं सीवेज की नालियों के पास लगे हैं। बरसात में तो सीवेज का गंदा-बदबूदार पानी पूरे चार महीने तक घरों तक पहुंचता है। 2 जनवरी शुक्रवार को भी भास्कर टीम ने मौके पर देखा तो यहां घरों में मटमैला पानी रखा था। यहां के लोग इसी का इस्तेमाल खाना बनाने और पीने के लिए करते हैं। 50 करोड़ से पानी की लाइन बिछाई गई, लेकिन नालियों से गुजरी यह लाइन बस दिखाने की है। बचे हुए 95 करोड़ सीवेज नेटवर्क पर लगने थे। लेकिन, इसका प्लान ही फाइलों से जमीन पर नहीं उतरा। शिव शक्ति नगर… सीवेज की नाली में पानी की लाइन इन इलाकों में ज्यादा परेशानी
शिव शक्ति नगर, प्रीत नगर, ब्लू मून कॉलोनी, नवाब कॉलोनी, उड़िया बस्ती, गरीब नगर, कल्याण नगर, शिवनगर, अन्नू नगर आदि। 42 बस्तियों की स्थिति खराब
भोपाल गैस त्रासदी के बाद से सुप्रीम कोर्ट ने यहां की 42 बस्तियों के ग्राउंड वॉटर की मॉनीटरिंग कमेटी बना रखी है। यह कमेटी यहां के पानी की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को देती है। इसी रिपोर्ट के आधार पर 2018 में में सुप्रीम कोर्ट ने यहां के लोगों को सुर​क्षित पेयजल के लिए पाइप लाइन और सीवेज नेटवर्क बनाने के आदेश दिए थे। 10 मिनट तक बदबूदार पानी
गैस पीड़ित संगठन की रचना ढींगरा बताती हैं कि सीवेज नेटवर्क बिछाने के बजाय करीब 50 करोड़ रुपए खर्च कर केवल पीने के पानी की पाइप लाइन नालियों के भीतर बिछा दी गई। नतीजा- नल चालू होने के पहले 10 मिनट तक घरों में गंदा, बदबूदार और दूषित पानी आता है। 20 से अधिक बस्तियों का यही हाल है। सच छिपाने के लिए टंकियों में लिखवाई झूठी तारीख… नगर निगम के ओवरहैड टैंक महीनों से साफ नहीं हुए है। इसका खुलासा दैनिक भास्कर ने किया था। अब अफसर अपने बचाव में टंकियों पर नई तारीखें लिखने लगे हैं। शुक्रवार सुबह वेटरनरी अस्पताल के पास वाले टैंक के गेट के बाहर सफाई की नई तारीख लिख दी गई। लोग बताते हैं कि टंकी साफ किए बिना तारीख लिखी गई। पूरे शहर का ऑडिट करा रहे हैं
पूरे शहर का ऑडिट कराया जा रहा है। जहां जो दिक्कतें हैं उन्हें दूर करने के लिए काम कर रहे हैं। जहां पुरानी हैं, वहां पानी के सैंपल कराए जा रहे हैं। शुक्रवार को 340 जगह पानी की टेस्टिंग की गई।
-संस्कृति जैन, आयुक्त नगर निगम भोपाल अफसरो को जांच के निर्देश दिए
अफसरों के साथ शुक्रवार को बैठक की है। निगम कमिश्नर भी मौजूद थीं। जिन इलाकों में पुरानी पाइप लाइनें नाली से गुजर रही हैं, उनमें सीवेज तो नहीं मिल रहा है। इसकी जांच कराई जाएगी।
-रविंद्र यती, एमआईसी मेंबर

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