सिस्टम की लेटलतीफी:मंडी में सोयाबीन बेचा, 20 दिन के बाद भी 90 हजार किसानों को भावांतर नहीं, ऐसी आठ हजार शिकायतें

मध्य प्रदेश में भावांतर योजना के तहत सोयाबीन बेचने वाले करीब 90 हजार किसानों को अब तक अंतर की राशि नहीं मिल पाई है। यह स्थिति 20 दिसंबर के बाद से बनी हुई है। मंडियों में बिक्री के बावजूद अंतर की राशि नहीं मिलने से किसानों में नाराजगी बढ़ रही है। यही कारण है कि मंडी बोर्ड के दफ्तर में सीएम हेल्पलाइन पर इससे जुड़ी करीब 8 हजार से ज्यादा शिकायतें किसानों ने दर्ज कराई हैं। हालांकि, इन शिकायतों के समाधान के लिए मंडी बोर्ड और जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। किसानों द्वारा बेची गई फसल के अंतर की राशि नहीं मिलने की शिकायतें भोपाल कलेक्टोरेट की जनसुनवाई सहित प्रदेशभर के कलेक्टोरेट में दर्ज कराई जा रही हैं। हर जगह से यही आश्वासन मिल रहा है कि अगले कुछ दिनों में राशि का भुगतान उनके खातों में हो जाएगा। हालांकि, राशि नहीं पहुंचने के पीछे मंडी बोर्ड के अफसर तरह-तरह की खामियां बता रहे हैं। पहली खामी यह बताई जा रही है कि बहुत सारे किसान हैं, जिनके खाते अपडेट नहीं हैं, यानी डीबीटी से नहीं जुड़े हैं। किसानों के आईएफएससी कोड ठीक नहीं हैं। बहुत सारे किसान ऐसे भी हैं जिन्होंने फसल बीमा की राशि ले ली है। इसलिए उन किसानों के खाते में नियमानुसार 25 फीसदी राशि काटकर ट्रांसफर की जा रही है। यही कारण भी है कि किसान शिकायत दर्ज करा रहे हैं। प्रदेश में 9 लाख 36 हजार किसानों ने योजना के तहत रजिस्ट्रेशन कराया था। यह रजिस्ट्रेशन 24 अक्टूबर 2025 से शुरू हुआ था। इसके तहत 15 फरवरी तक फसल मंडी में बेच सकते हैं। 7 लाख 69 हजार किसानों ने 16.42 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन बेचा है। टन है। सरकार करीब 1300 करोड़ रुपए का भुगतान कर चुकी है। अपने ही पैसे के लिए दो एजेंसियों के बीच घूम रहे किसान भोपाल सहित प्रदेशभर में जिन किसानों को भाव के अंतर की राशि नहीं मिली है, वे दो एजेंसियों के अफसरों के दफ्तर के चक्कर लगा रहे हैं। पहला कृषि विभाग और दूसरा मंडी कार्यालय। लेकिन, दोनों ही एजेंसियों के अफसर समस्या का समाधान करने की बजाय पल्ला झाड़ रहे हैं। भोपाल में किसान जब डिप्टी डायरेक्टर कृषि कार्यालय पहुंचते हैं, तो उनसे कहा जाता है कि मंडी कार्यालय जाइए और जब करोंद मंडी में पहुंचते हैं तो उन्हें कृषि विभाग के अफसरों से बात करने के लिए कहा जा रहा है। यही कारण है कि भोपाल में पिछले 10 दिन से ज्यादा समय होने के बाद भी किसानों को बेची गई फसल के अंतर की राशि नहीं मिल पाई है। किसानों से ही जानें, उनकी समस्या …. किसान काशीराम निवासी रमपुरा बालाचौन बैरसिया ने बताया कि उसने इस बार भी सोयाबीन की फसल बोई थी। जिसे बेचने के लिए जब मैं मंडी पहुंचा, तो पता चला कि मेरे भावांतर के रजिस्ट्रेशन में खेती का रकबा जीरो कर दिया है। जिससे भावांतर योजना का फायदा नहीं मिल रहा। किसान गोकल बाई निवासी मानाखेड़ी बैरसिया ने बताया कि उन्होंने सोयाबीन की फसल गुना मंडी में बेची थी। भावांतर में रजिस्ट्रेशन होने से उन्हें 18 हजार 700 रुपए मिलने थे, लेकिन बैंक खाते में आधी राशि ही मिली है। कृषि विभाग में संपर्क किया गया, लेकिन जांच की बात कही गई है। यहां मिलीभगत… पुरानी फसल पर दिखाया भावांतर किसान प्रदीप दांगी निवासी गरेठिया दांगी बैरसिया ने शिकायत दर्ज कराई है कि उन्होंने 14 और 15 नवंबर को मंडी में सोयाबीन की पुरानी फसल बेची थी। रसीद भी मंडी में पेश नहीं की थी, बावजूद इसके मंडी कर्मचारियों ने मिलीभगत कर मेरी पुरानी फसल पर भावांतर योजना का फायदा दिखा दिया।

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